शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का योगी सरकार पर गोमाता के मुद्दे पर वार: वाराणसी से लखनऊ तक यात्रा

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शंकराचार्य  अविमुक्तेश्वरानंद का  योगी सरकार  पर  गोमाता  के मुद्दे पर वार:  वाराणसी  से  लखनऊ  तक  यात्रा

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और योगी सरकार के बीच गोमाता पर सियासत तेज

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच जारी विवाद अब 'गोमाता' के मुद्दे पर केंद्रित हो गया है। शंकराचार्य ने 6 मार्च से वाराणसी से लखनऊ तक 'गोमाता' को 'राज्य माता' घोषित करने और बीफ निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर एक पदयात्रा की घोषणा की है। यह यात्रा 12 मार्च को लखनऊ में एक बड़ी सभा के साथ समाप्त होगी, जहाँ वे हजारों लोगों के साथ सरकार के खिलाफ हुंकार भरेंगे।

विवाद की पृष्ठभूमि और संतों की टकराहट

यह विवाद प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान से शंकराचार्य को रोके जाने और बटुकों की पिटाई के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए। सीएम योगी ने शंकराचार्य पर बिना नाम लिए 'कालनेमि' और 'सनातन धर्म को कमजोर करने वाले' करार दिया था, और शंकराचार्य के पद की मर्यादा पर सवाल उठाए थे। जवाब में, अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ को 'फर्जी योगी' और 'औरंगजेब से भी बुरा' बताया था। अब, शंकराचार्य ने नकली या असली हिंदू के मसले को छोड़कर गोमाता के मुद्दे को उठाया है।

शंकराचार्य की मांगें और कार्यक्रम

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रदेश सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था कि वह गोमाता को राज्य माता घोषित करे और बीफ का निर्यात बंद करे, जिसकी समय सीमा 6 मार्च को समाप्त हो रही है। अपनी पदयात्रा के दौरान, वे इन मांगों को प्रमुखता से उठाएंगे। लखनऊ के आशियाना क्षेत्र में 12 मार्च को आयोजित होने वाली सभा के लिए अभी तक पुलिस-प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई है, जिससे कार्यक्रम के आयोजन पर सवाल बना हुआ है। लखनऊ प्रशासन ने पहले भी भीड़ को नियंत्रित करने के कारण बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की कथा को अनुमति नहीं दी थी।

सरकार का रुख और राजनीतिक निहितार्थ

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि शंकराचार्य का स्वागत किया जाएगा, लेकिन गाय को राज्य माता का दर्जा देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गायों को खरोंच तक नहीं लगती। शंकराचार्य ने इस दावे को झूठा बताते हुए कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार यूपी में गायों की संख्या में 4% की कमी आई है। उन्होंने भाजपा पर गो-तस्करों से चंदा लेने का भी आरोप लगाया।

वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद इस अभियान के जरिए खुद को शंकराचार्य के रूप में स्थापित करना और यूपी सरकार को गोमाता विरोधी साबित करना चाहते हैं, जबकि सीएम योगी स्वयं गोभक्त माने जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का मानना है कि संतों के इस विवाद से प्रदेश सरकार को ही नुकसान हो सकता है, क्योंकि हिंदू धर्म में शंकराचार्य का पद बहुत बड़ा होता है और उनके खिलाफ हुई एफआईआर का संदेश लोगों में गलत गया है।

Arvind Vishwakarma