मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका और मंत्री का पलटवार
मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है। कांग्रेस के विधायकों के कानूनी दांव-पेंच में उलझने से दिग्विजय सिंह वाली राज्यसभा सीट पर कांग्रेस का जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका व्यक्त की है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आरोप
भोपाल स्थित अपने आवास पर मीडिया से चर्चा करते हुए उमंग सिंघार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी हर जगह सरकारें खरीदती है, सरकारें तोड़ती और बेचती है। सिंघार ने दावा किया कि कई राज्यों में ऐसा हो चुका है और यदि मध्य प्रदेश में हॉर्स ट्रेडिंग होती है, तो यह कोई बड़ी बात नहीं होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस इस संभावना से अवगत है और पूरी मजबूती के साथ तैयार है। सिंघार ने विश्वास व्यक्त किया कि कांग्रेस के सभी विधायक पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे।
सिंघार ने देश की वर्तमान स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश चुनावी सत्तावाद (ऑटोक्रेसी) की ओर बढ़ रहा है, जहां संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जैसा कि देश और प्रदेश में देखा जा रहा है। उन्होंने न्यायपालिका से लोकतंत्र को बचाने के लिए विशेष ध्यान देने का आग्रह भी किया।
PWD मंत्री राकेश सिंह का पलटवार
नेता प्रतिपक्ष के हॉर्स ट्रेडिंग वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश के PWD मंत्री राकेश सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जब हार सामने दिख रही हो, तो उसे जस्टिफाई करने के लिए कोई न कोई रास्ते ढूंढने ही पड़ते हैं। तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने के सवाल पर मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह निर्णय पार्टी स्तर पर लिया जाएगा और इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित
मध्य प्रदेश में 9 अप्रैल को तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें बीजेपी के सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन तथा कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की सीटें शामिल हैं।
एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की आवश्यकता होती है। विधानसभा के आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं। हालांकि, कुछ विधायकों से जुड़ी कानूनी जटिलताओं ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं:
इन कानूनी अड़चनों के कारण, कांग्रेस के प्रभावी विधायकों की संख्या घटकर 62 रह गई है। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी मध्य प्रदेश में लगभग डेढ़ दर्जन विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की घटना हो चुकी है, जिससे कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग का डर सता रहा है।
Arvind Vishwakarma