की मांग, CM सम्राट बोले- <सरकार स्पष्ट विजन के साथ मिशन मोड में>
IPL 2026 में बिहार के खिलाड़ियों जैसे ईशान किशन, वैभव सूर्यवंशी और साकिब हुसैन के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए, वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने IPL में बिहार की अपनी टीम बनाने की मांग की है। बिहार के मूल निवासी अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा, "क्या आपको नहीं लगता चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए?" उन्होंने बिहार की मिट्टी के टैलेंट पर जोर देते हुए कहा कि अगर हमारे बच्चों को सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलें, तो बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम होगी।
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के सोशल मीडिया पोस्ट पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूं। बिहार के क्रिकेट "इमोशन" के लिए सरकार स्पष्ट "विजन" के साथ "मिशन" मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।"
<अनिल अग्रवाल: एक बिहारी से 'मेटल किंग' तक का सफर>
अनिल अग्रवाल, जो बिहार के पटना से निकलकर ग्लोबल बिजनेसमैन बने, आज वेदांता ग्रुप के चेयरमैन हैं। उनकी कुल संपत्ति 35,000 करोड़ रुपए से अधिक है, जिससे वे बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। राजस्थान मूल के उनके परिवार के कारोबार के सिलसिले में बिहार आने के बाद उनका जन्म पटना में हुआ। शुरुआती पढ़ाई के बाद 19 साल की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में मुंबई पहुंचे, जहां कई असफलताओं के बाद उन्होंने वेदांता की स्थापना की। वेदांता आज जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है।
<शुरुआती संघर्ष और वेदांता की स्थापना>
पटना के एक छोटे व्यवसायी परिवार से आने वाले अनिल अग्रवाल ने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाने के बाद 19 साल की उम्र में मुंबई का रुख किया। वहां उन्होंने कई छोटे-बड़े व्यवसाय किए, जिनमें शुरुआती दौर में असफलता मिली। सालों के संघर्ष और डिप्रेशन के बाद 1976 में उन्होंने शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग फील्ड में 9 बिजनेस शुरू किए, लेकिन हार नहीं मानी। 1976 में ही उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज की शुरुआत की, जिसने धीरे-धीरे तरक्की की।
<भारत के 'मेटल किंग' बनने तक>
2001 में भारत सरकार द्वारा सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी के ऑफर के बाद, वेदांता रिसोर्सेज ने भारत एल्युमिनियम कंपनी और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी। इस फैसले से अनिल अग्रवाल को मेटल प्रोडक्शन सेक्टर में स्थापित होने में मदद मिली और उन्हें भारत का 'मेटल मैन' कहा जाने लगा।
<लंदन स्टॉक एक्सचेंज में पहली भारतीय कंपनी>
2003 में अनिल अग्रवाल लंदन चले गए और वहां वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया। यह पहली भारतीय कंपनी थी जिसने यह उपलब्धि हासिल की, जिससे उन्हें करीब 7 हजार करोड़ रुपए का फायदा हुआ।
<पारिवारिक जीवन>
अनिल अग्रवाल अपनी पत्नी किरण अग्रवाल को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं। उनके दो बच्चे हैं: बेटे अग्निवेश अग्रवाल, जिनका 49 साल की उम्र में निधन हो गया, और बेटी प्रिया अग्रवाल, जो वेदांता के बोर्ड में शामिल हैं और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं। अग्निवेश अग्रवाल ने भी वेदांता समूह में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं।
Pushpendra Chaubey