जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर बस में आग, 20 यात्रियों की दर्दनाक मौत

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जैसलमेर-जोधपुर हाईवे  पर बस में आग,  20 यात्रियों  की दर्दनाक मौत

जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर बस में लगी आग, 20 लोगों की मौत

मंगलवार दोपहर 3:30 बजे राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर एक चलती एसी स्लीपर बस में आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना में 20 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 15 लोग घायल हो गए। मरने वालों में एक स्थानीय पत्रकार राजेंद्र सिंह चौहान और 79 वर्षीय हुसैन खां की पहचान हुई है। बस में कुल 57 यात्री सवार थे।

झुलसे यात्रियों का इलाज

हादसे में घायल हुए 15 लोगों में दो बच्चे और चार महिलाएं शामिल हैं। इन सभी को पहले जैसलमेर के जवाहिर हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जोधपुर रेफर कर दिया गया। अधिकांश घायल 70 प्रतिशत तक झुलसे हुए हैं। मृतकों की पहचान डीएनए टेस्ट के जरिए की जाएगी।

केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत

केंद्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। जैसलमेर कलेक्टर प्रताप सिंह ने मृतकों के परिजनों से संपर्क करने की अपील की है। पोकरण विधायक प्रतापपुरी ने हादसे में 20 मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हादसा शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ।

हादसे का विवरण

यह घटना जैसलमेर के थईयात गांव के पास हुई। बस रोजाना की तरह दोपहर 3 बजे जैसलमेर से जोधपुर के लिए रवाना हुई थी। करीब 20 किलोमीटर दूर पहुंचने पर अचानक बस के पिछले हिस्से से धुआं उठने लगा। कुछ ही समय में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया।

यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए चलती बस से कूदने की कोशिश की। हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। दमकल विभाग और पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया।

बस की स्थिति और हादसे के कारण

बताया जा रहा है कि यह बस पांच दिन पहले ही खरीदी गई थी और इसे नॉर्मल बस को एसी स्लीपर में मॉडिफाई किया गया था। आग लगने के बाद बस का दरवाजा लॉक हो गया, जिससे यात्री अंदर फंस गए। चश्मदीदों के अनुसार, आर्मी ने जेसीबी की मदद से बस का गेट तोड़ा और शवों को बाहर निकाला।

अंतिम शब्द

यह हादसा न केवल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता को भी दिखाता है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को ऐसे हादसों से बचने के लिए सख्त नियम और कानून लागू करने चाहिए।