जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश
जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में उनके परिवार के सदस्य और सात देशों के मुख्य न्यायाधीश भी मौजूद थे। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधिमंडल ने किसी CJI के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया।
परिवार और परंपराओं का सम्मान
शपथ लेने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने अपने भाई और बहन के पैर छूकर सम्मान जताया। साथ ही उन्होंने पूर्व CJI बीआर गवई से गले मिलकर सौहार्दपूर्ण संकेत दिया। उनके भाई ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत गांव पेटवाड़ से जुड़े हुए हैं और वहां के स्कूल टॉपर्स को हर साल सम्मानित करते हैं।
कार्यकाल और कॉलेजियम में भूमिका
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा और वे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के हेड होंगे। कॉलेजियम सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर पर निर्णय लेता है। उनके नेतृत्व में कॉलेजियम में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जेके माहेश्वरी, और जस्टिस एमएम सुंदरेश शामिल होंगे।
महत्वपूर्ण फैसले और योगदान
जस्टिस सूर्यकांत ने अपने करियर में संवैधानिक और मानवाधिकार से जुड़े 1000 से अधिक मामलों में निर्णय दिए हैं। उन्होंने आर्टिकल 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा और बिहार SIR मामले में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आदेश दिया।
व्यक्तिगत जीवन
जस्टिस सूर्यकांत का परिवार भी शिक्षा और समाज सेवा से जुड़ा हुआ है। उनके पिता संस्कृत शिक्षक और साहित्यकार थे। उनकी पत्नी सविता सूर्यकांत इंग्लिश प्रोफेसर रही हैं। उनका विवाह 1987 में हुआ और उन्होंने दहेज का विरोध करते हुए विवाह में कोई दहेज नहीं लिया।
गांव का गौरव
जस्टिस सूर्यकांत का गांव पेटवाड़, हिसार से 50 किमी दूर स्थित है। यहां स्वतंत्रता सेनानी और शहीद जवानों के नाम के साथ गांव के प्रमुख लोगों का सम्मान किया गया है। इस सूची में जस्टिस सूर्यकांत का नाम सबसे ऊपर है।
L. N. Bhargava