कांग्रेस का वार विजय शाह से झंडा फहरवाने पर BJP संविधान को चुनौती में घिरी

· 1 min read
कांग्रेस का वार विजय शाह से झंडा फहरवाने पर BJP संविधान को चुनौती में घिरी

विजय शाह के झंडा फहराने पर मध्यप्रदेश की सियासत गरमाई

मध्यप्रदेश में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कैबिनेट मंत्री विजय शाह द्वारा मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में फंसे शाह के खिलाफ विपक्षी दल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी और अदालत की कार्रवाई

विजय शाह पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। यह बयान 12 मई 2025 को इंदौर जिले के रायकुण्डा गांव में हलमा (सामूहिक श्रमदान और सामुदायिक सहभागिता की जनजातीय परंपरा) के एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया गया था।

इस कथित टिप्पणी से जुड़ा वीडियो पिछले साल सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसके बाद शाह की तीखी आलोचना हुई। बाद में उन्होंने अपने बयान पर खेद जताते हुए कहा था कि वह कर्नल कुरैशी का अपनी बहन से भी अधिक सम्मान करते हैं।

मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने पुलिस को विजय शाह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद मानपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 152, धारा 196 (1) (बी) और धारा 197 (1) (सी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिनका संबंध भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता, समुदायों के बीच सद्भाव और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका से जुड़े प्रावधानों से है।

इसके बाद 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि कर्नल कुरैशी के बारे में विवादित टिप्पणियों के सिलसिले में विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर दो सप्ताह के भीतर फैसला किया जाए। इससे पहले हाई कोर्ट ने भी इस मामले में शाह को फटकार लगाई थी।

गणतंत्र दिवस समारोह में विजय शाह की भूमिका पर सवाल

गणतंत्र दिवस के अवसर पर विजय शाह ने अपने गृह जिले खंडवा के स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। शाह राज्य सरकार में जनजातीय कार्य विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग और भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

इसी भूमिका को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी ने सवाल उठाया कि कर्नल कुरैशी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में जब सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट संज्ञान ले चुके हैं, तब भी विजय शाह को अब तक मंत्री पद से क्यों नहीं हटाया गया और उन्हें गणतंत्र दिवस जैसे अहम अवसर पर मुख्य समारोह में तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी क्यों दी गई।

कांग्रेस के आरोप: BJP संविधान को चुनौती दे रही

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में पार्टी कार्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विजय शाह को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाया जाना चाहिए था, लेकिन इसके उलट भाजपा ने गणतंत्र दिवस पर उनसे झंडा फहरवाया। पटवारी के मुताबिक, इस कदम के जरिए भाजपा संविधान को चुनौती दे रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि विजय शाह से अब तक इस्तीफा न लिया जाना मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। पटवारी ने सरकार पर अदालतों के निर्देशों का सम्मान न करने और संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी विजय शाह के गणतंत्र दिवस समारोह में तिरंगा फहराने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा एक "बेशर्म पार्टी" बन गई है और जिस कार्रवाई का दावा पार्टी ने शाह के खिलाफ किया है, वह केवल औपचारिकता भर है। सिंघार के अनुसार, राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को कई मामलों में स्वत: संज्ञान लेना पड़ रहा है।

सरकार और BJP की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के आरोपों पर उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इंदौर में गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में शामिल होने के बाद जब मीडिया ने इस विवाद पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि इस अवसर पर बधाई और शुभकामनाएं दी जानी चाहिए, और उन्होंने राजनीतिक सवालों से किनारा कर लिया।

दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ के प्रभारी आशीष अग्रवाल ने विजय शाह का बचाव करते हुए कहा कि मामला पहले से ही अदालत के संज्ञान में है और जो भी हो रहा है, वह न्यायालय के निर्देशों के अनुसार हो रहा है। उनका कहना था कि कांग्रेस की इच्छा के अनुसार कार्रवाई नहीं की जा सकती।

खंडवा में जब मीडिया ने कांग्रेस की आपत्तियों पर विजय शाह की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की, तो वे लोगों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देने के बाद बिना कुछ कहे वहां से चले गए।

मामले की पृष्ठभूमि और आगे की दिशा

कर्नल सोफिया कुरैशी उस समय सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने एक अन्य महिला अधिकारी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी मीडिया को दी थी। इसी संदर्भ में दिए गए कथित बयान को लेकर विजय शाह विवादों में घिर गए।

मामले पर दर्ज एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच अब मुख्य सवाल यह है कि राज्य सरकार शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति पर क्या निर्णय लेती है। कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार राजनीतिक और संवैधानिक सवाल के रूप में उठा रही है, जबकि भाजपा अदालत में लंबित प्रक्रिया का हवाला देकर अपने मंत्री का बचाव कर रही है।

फिलहाल, विजय शाह मंत्रिमंडल में बने हुए हैं और गणतंत्र दिवस समारोह में उनकी मुख्य भूमिका ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ हमला तेज करने का नया अवसर दे दिया है। आगे की कार्रवाई न्यायालय और राज्य सरकार के निर्णयों पर निर्भर करेगी।

Sharad Shrivastava