शशि थरूर के माकपा से संपर्क की अटकलें, एलडीएफ ने बातचीत से किया इंकार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य शशि थरूर के बारे में ऐसी खबरें सामने आईं कि उन्होंने दुबई में माकपा से जुड़े कुछ लोगों के साथ चर्चा की है। थरूर इन दिनों दुबई में एक साहित्य महोत्सव में भाग ले रहे हैं। इन दावों के बीच उनकी कांग्रेस नेतृत्व से नाराजगी और पार्टी में उन्हें दरकिनार किए जाने की अटकलें भी जोड़ी जा रही हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, थरूर से रविवार को पत्रकारों ने इन खबरों पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी। उन्होंने कहा कि दुबई की यात्रा के दौरान उन्होंने ऐसी खबरें देखी हैं, लेकिन विदेश में रहते हुए इस तरह के राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी पृष्ठभूमि में यह अटकलें लगनी शुरू हुईं कि क्या वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में जाने पर विचार कर रहे हैं।
थरूर की कथित नाराजगी की वजह उन दावों को माना जा रहा है, जिनमें कहा गया कि कोच्चि में हाल के एक कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी उपेक्षा की और केरल में पार्टी के कुछ नेता उन्हें लगातार दरकिनार कर रहे हैं। इन घटनाक्रमों के चलते उनके राजनीतिक भविष्य और संभावित दलबदल को लेकर चर्चा तेज है, हालांकि थरूर ने इस पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है।
एलडीएफ संयोजक का बयान
केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के संयोजक टी पी रामकृष्णन ने शशि थरूर के साथ किसी भी तरह की बातचीत की खबरों से साफ इनकार किया। दुबई में माकपा से जुड़े लोगों के साथ थरूर की कथित बातचीत पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी कोई वार्ता नहीं हुई है और एलडीएफ ने थरूर से किसी प्रकार की चर्चा नहीं की है।
रामकृष्णन ने स्पष्ट किया कि थरूर इस समय कांग्रेस में हैं और कांग्रेस की राजनीतिक विचारधारा का पालन करने के लिए बाध्य हैं। उनके अनुसार, यदि थरूर कांग्रेस छोड़ते हैं तो ही उनके राजनीतिक रुख पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल थरूर उस श्रेणी में नहीं आते, जिसमें एलडीएफ पार्टियों, समूहों या व्यक्तियों को अपने साथ जोड़ने के लिए तैयार रहता है।
एलडीएफ की संभावनाओं पर संकेत
रामकृष्णन ने यह भी कहा कि एलडीएफ और माकपा उन व्यक्तियों, समूहों या राजनीतिक दलों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं जो वाम मोर्चे के राजनीतिक रुख को स्वीकार करते हैं और मोर्चे की मदद करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि एलडीएफ का आधार बढ़ाने के लिए नए लोगों का स्वागत है, बशर्ते वे मोर्चे की नीतियों और विचारधारा से सहमत हों।
एलडीएफ संयोजक ने दोहराया कि यदि भविष्य में शशि थरूर अपना राजनीतिक रुख बदलते हैं और वाम मोर्चे की लाइन को स्वीकार करते हैं, तो उनसे बातचीत करने में कोई संकोच नहीं होगा। अभी की स्थिति पर उन्होंने जोर देकर कहा कि न तो कोई बातचीत हुई है और न ही थरूर फिलहाल एलडीएफ में शामिल होने की श्रेणी में आते हैं।
अटकलें जारी, आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं
रविवार को यह खबरें फैलीं कि शशि थरूर ने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में भाग लेने के बाद दुबई में माकपा के करीबी लोगों से मुलाकात की थी। इन्हीं खबरों के आधार पर उनके दल बदल और एलडीएफ से निकटता की अटकलें मजबूत हुईं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर न तो थरूर ने इस पर कोई टिप्पणी की है और न ही एलडीएफ नेतृत्व ने ऐसी किसी मुलाकात की पुष्टि की है।
कुल मिलाकर, शशि थरूर के भविष्य को लेकर राजनीतिक अटकलें जारी हैं, लेकिन अभी तक न तो उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का संकेत दिया है और न ही एलडीएफ या माकपा के साथ किसी औपचारिक बातचीत की पुष्टि हुई है। दोनों पक्षों के बयानों से फिलहाल यही स्पष्ट है कि औपचारिक स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया गया है और आगे की स्थिति थरूर के राजनीतिक रुख पर निर्भर करेगी।
Adarsh Chaurasiya