रीवा और सागर कलेक्टरों की कार्यशैली पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने दो आईएएस अधिकारियों, रीवा की कलेक्टर प्रतिभा पाल और सागर के कलेक्टर संदीप जीआर, पर उनकी कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस ने इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ तीखे बयान देते हुए उनकी ईमानदारी और प्रशासनिक क्षमता पर संदेह जताया है।
रीवा कलेक्टर के खिलाफ विधायक अभय मिश्रा का आरोप
रीवा जिले के सेमरिया विधायक अभय मिश्रा ने रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वे खुद को ईमानदार कहती हैं, तो वह उनकी पोल खोल सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर मुख्यमंत्री को मानने के बजाय उप मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करती हैं। मिश्रा ने कहा कि क्षेत्र में सरकारी जमीनें लूट और बिक्री का शिकार हो चुकी हैं। उन्होंने सत्याग्रह करते हुए कलेक्टर कार्यालय में विरोध प्रदर्शन और उपवास का ऐलान किया है। इसके साथ ही, उन्होंने बिजली बिलों के विरोध में जल्द ही बीस हजार लोगों के साथ प्रदर्शन करने की बात कही है।
सागर कलेक्टर के ट्वीट पर कांग्रेस का तंज
दूसरी ओर, सागर कलेक्टर संदीप जीआर के दशहरा पर्व पर किए गए ट्वीट को लेकर कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता ने टिप्पणी की। कलेक्टर ने ट्वीट में विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए इसे सत्य पर असत्य की विजय का पर्व बताया। गुप्ता ने इस ट्वीट के जरिए व्यवस्थागत विफलता और एमपी की राजनीतिक स्थिति पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह राज्य का हाल है कि अब सत्य पर असत्य की विजय के त्योहार मनाए जा रहे हैं।
कांग्रेस के आरोप और प्रशासनिक जवाबदेही
कांग्रेस ने इन दोनों घटनाओं को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही और ईमानदारी की कमी का मुद्दा उठाया है। रीवा और सागर में अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने से राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव गहराता जा रहा है। इन आरोपों के बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह मामला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि राजनीति और प्रशासनिक कार्यशैली के बीच तालमेल की कमी से जनता प्रभावित हो रही है। कांग्रेस के इन आरोपों ने प्रशासन पर भरोसे की कमी को उजागर किया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस विवाद पर क्या कदम उठाती है।