केरल चुनाव में कांग्रेस की नई रणनीति: गुटबाजी पर लगाम, एकजुटता से जीत का दावा
केरल विधानसभा चुनाव में 2021 की पिछली चूक से सबक लेते हुए, कांग्रेस हाईकमान ने इस बार सूबे के शीर्ष नेताओं के बीच गुटबाजी को लगभग पूरी तरह से थाम लिया है। वामपंथी दलों के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार के आक्रामक चुनावी अभियान को देखते हुए, चुनाव के दौरान केरल कांग्रेस की एकजुटता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती थी।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस पहल में सबसे अहम सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने के. सुधाकरण, शशि थरूर, वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथेला और के. मुरलीधरन जैसे नेताओं को गुटीय दायरे से बाहर लाकर एकजुट करने का प्रयास किया। विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिए जाने से नाराज के. सुधाकरण को साधने की पहल इसका एक ताजा प्रमाण है। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के सत्ता में आने की संभावनाओं को देखते हुए, केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज्य के नेतृत्व के लिए अपनी दावेदारी ठोकने का मौका गंवाना नहीं चाहते थे। इसके मद्देनजर ही सुधाकरण समेत कुछ अन्य लोकसभा सांसद विधानसभा चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे थे, मगर हाईकमान ने सांसदों को विधानसभा टिकट नहीं देने का सैद्धांतिक फैसला कर इन सबकी राह रोक दी।
विधानसभा टिकट न मिलने के कारण सुधाकरण कांग्रेस के चुनाव कार्यक्रमों में शरीक नहीं हो रहे थे। कभी वामपंथी दलों का गढ़ रहे कन्नूर तथा आस-पास के जिलों में कांग्रेस को ताकतवर बनाने में सुधाकरण की बड़ी भूमिका रही है और उनका प्रभाव भी है। इसलिए कोई जोखिम न लेते हुए, राहुल गांधी ने सीधे सुधाकरण को फोन कर शनिवार को दिल्ली बुलाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर सुधाकरण की बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी तथा कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हुए। इस बैठक में उन्हें चुनाव में सक्रिय रूप से जुट जाने के लिए राजी कर लिया गया।
राहुल गांधी ने सुधाकरण तथा उनके परिवार संग हुई मुलाकात की तस्वीरें खुद एक्स पर साझा कीं और उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि के. सुधाकरण ने केरल की जनता के लिए संघर्ष करते हुए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है। उन्होंने यूडीएफ के एकजुट और मजबूत होने की बात कहते हुए केरल में 100 सीटों के साथ एक जबरदस्त जीत की ओर बढ़ने का दावा करने से भी गुरेज नहीं किया।
वस्तुतः, केरल के चुनाव में कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से पहली बार एक निश्चित संख्या में सीटें जीतने का यह दावा किया गया। केरल का चुनावी मिजाज बीते कई दशकों से हर पांच साल में सत्ता बदलने का रहा था, मगर 2021 में एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर सबको हैरान कर दिया था और यूडीएफ की पराजय की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस की गुटबाजी को माना गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कई राज्यों के चुनाव में मिली मात को देखते हुए पार्टी हाईकमान केरल को लेकर इसीलिए सतर्क है। कुछ महीने पहले राहुल गांधी तथा खरगे ने कांग्रेस की लाइन-लेंथ से इतर चल रहे शशि थरूर को बुलाकर दो घंटे बातचीत कर उनकी नाराजगी थामी, जिसके परिणामस्वरूप शशि थरूर केरल चुनाव में अभी कांग्रेस के प्रचार अभियान में अपनी ऊर्जा झोंक रहे हैं। इसी तरह, केरल में नेता विपक्ष वीडी सतीशन हों या वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथेला, दोनों मुख्यमंत्री पद के लिए उनके उछाले जा रहे नाम को एक सुर से यह कहते हुए नकार रहे हैं कि कांग्रेस नेतृत्व चुनाव बाद इसका फैसला करेगा। हाईकमान ने जहां सूबे के शीर्ष नेताओं को पूरी तरह साध लिया है, वहीं केसी वेणुगोपाल जिला स्तर पर टिकट बंटवारे के बाद उभरे कुछ स्थानीय नेताओं के असंतोष को थाम कर 'टीम कांग्रेस' के मैदान में होने का संदेश देने में जुटे हैं।
Lokendra Mishra