खजराना गणेश मंदिर की दानपेटियों से निकले पौने दो करोड़, विदेशी करेंसी-आभूषण भी

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खजराना गणेश मंदिर की दानपेटियों से निकले पौने दो करोड़, विदेशी करेंसी-आभूषण भी

खजराना गणेश मंदिर की दान पेटियों से 1.78 करोड़ रुपए की गिनती पूरी

खजराना गणेश मंदिर की दान पेटियों से इस बार 1 करोड़ 78 लाख रुपए नकद मिले हैं। इसके अलावा भक्तों ने भगवान गणेश को विदेशी करेंसी और सोने-चांदी के आभूषण भी अर्पित किए हैं, जिनकी कीमत का अलग से आकलन किया जाएगा। मंदिर में दान पेटियों की गिनती साल में तीन बार की जाती है। 1 अगस्त को हुई पिछली गिनती में 1 करोड़ 68 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई थी।

दान पेटियों की संख्या और भक्तों के पत्र

मंदिर परिसर में कुल 43 दान पेटियां लगाई गई हैं। इन पेटियों में नकदी और आभूषणों के साथ-साथ बड़ी संख्या में भक्तों के पत्र भी मिले हैं। कई श्रद्धालुओं ने अपनी निजी मनोकामनाओं, नौकरी से जुड़ी समस्याओं और पारिवारिक विवादों के समाधान की आशा में पत्र लिखकर भगवान के चरणों में समर्पित किए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था और राशि जमा करने की प्रक्रिया

मंदिर की प्रबंध समिति के मैनेजर घनश्याम शुक्ला के अनुसार, दान पेटियों की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की गई। पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से की गई, ताकि पूरी पारदर्शिता बनी रहे। प्राप्त नकद राशि को मंदिर के पंजाब नेशनल बैंक और यूनियन बैंक के खातों में जमा करा दिया गया है, जबकि सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा को कन्वर्ट कराकर अलग से मूल्य निर्धारित किया जाएगा।

गणना करने वाली टीम और बरामद सामग्री

दान पेटियों से निकलने वाली राशि की गणना नगर निगम परिषद कार्यालय के अधीक्षक प्रदीप दुबे के नेतृत्व में 25 सदस्यीय टीम ने की। गिनती के दौरान कुछ नकली नोट भी मिले, साथ ही एक मोबाइल फोन भी दान पेटियों से बरामद हुआ। इस बार भी बड़ी मात्रा में बंद हो चुके 2000 और 500 रुपए के नोट पाए गए। सोने-चांदी के असली और नकली दोनों प्रकार के आभूषण बड़ी संख्या में मिले हैं।

दान राशि का उपयोग और मंदिर की लोकप्रियता

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, दान पेटियों से प्राप्त राशि का इस्तेमाल मंदिर की धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों में किया जाता है। खजराना गणेश मंदिर सिर्फ आम भक्तों ही नहीं, बल्कि कई राजनीतिक नेताओं, उद्योगपतियों, खिलाड़ियों और बॉलीवुड हस्तियों की आस्था का भी प्रमुख केंद्र रहा है। मुख्य पुजारी अशोक भट्ट के अनुसार, हर बार दान पेटियां खोलने पर बड़ी मात्रा में धनराशि और मूल्यवान वस्तुएं मिलना भगवान गणेश के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा को दर्शाता है।

नए वर्ष पर भीड़ और विशेष अवसर

दिसंबर के अंत, 31 दिसंबर और नववर्ष के अवसर पर मंदिर में भारी भीड़ रहती है और इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद की जा रही है। सप्ताह के दिनों में सबसे ज्यादा भीड़ बुधवार को होती है, जबकि शनिवार और रविवार को भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। गणेश चतुर्दशी के दस दिनों और तिल चतुर्थी के दौरान तो यहां रोजाना हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

मंदिर का इतिहास

खजराना गणेश मंदिर होलकर राजघराने की महारानी अहिल्याबाई द्वारा वर्ष 1735 में बनवाया गया था। तब से यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है और समय के साथ इसकी ख्याति लगातार बढ़ती गई है।

Faraz Khan