लोक गायिका मैथिली ठाकुर राजनीति में कदम रखने को तैयार
प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने जा रही हैं। ऐसी खबरें हैं कि वे बिहार की दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। मैथिली ने हाल ही में बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की।
बीजेपी नेताओं से मुलाकात
विनोद तावड़े ने मैथिली ठाकुर के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की और लिखा कि मैथिली ठाकुर बिहार के बदलते स्वरूप को देखकर वापस अपने राज्य लौटने की इच्छा रखती हैं। उन्होंने कहा, "बिहार की जनता और विकास के लिए उनका योगदान अत्यावश्यक है।"
मैथिली ठाकुर का सफर
मधुबनी जिले के बेनीपट्टी की रहने वाली मैथिली ठाकुर ने 11 साल की उम्र में जीटीवी के कार्यक्रम 'सारेगामापा लिटिल चैंप्स' से प्रसिद्धि पाई। इसके बाद से उन्होंने भजन, लोकगीत और फिल्मी गाने गाए। संघर्षों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई और संगीत साधना को साथ लेकर आगे बढ़ने का सफर तय किया।
शुरुआती जीवन और संघर्ष
मैथिली ने अपनी शुरुआती पढ़ाई घर पर ही की क्योंकि आर्थिक तंगी के चलते उनके पिता उन्हें स्कूल नहीं भेज पाए। बाद में नगर निगम के स्कूल में उनका दाखिला हुआ। संगीत के प्रति उनकी रुचि और लगन ने उन्हें आगे बढ़ाया।
म्यूजिक करियर की शुरुआत
मैथिली ने 'द राइजिंग स्टार' शो में भाग लिया और फर्स्ट रनर अप बनीं। इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उन्होंने यूट्यूब और सोशल मीडिया के जरिए अपनी गायिकी को एक नई पहचान दी।
संगीत से सामाजिक जुड़ाव
कोरोना काल में मैथिली ने ब्लॉगिंग शुरू की और बिहार की संस्कृति और खान-पान को अपने चैनल के जरिए साझा करना शुरू किया। उनके यूट्यूब चैनल पर लाखों फॉलोअर्स हैं, जो उनके पारंपरिक गीतों को पसंद करते हैं।
राजनीति में नई भूमिका
अब मैथिली अपने राज्य के लोगों के लिए राजनीति में कदम रखने को तैयार हैं। बीजेपी में शामिल होकर वे बिहार के विकास और जनता की सेवा में योगदान देना चाहती हैं।
निष्कर्ष
मैथिली ठाकुर का राजनीतिक सफर उनके संगीत और सामाजिक जुड़ाव के अनुभव से प्रेरित है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे राजनीति में अपनी नई भूमिका को कैसे निभाती हैं और अपने राज्य के विकास में किस तरह योगदान करती हैं।