मध्य प्रदेश में नवंबर की रेकॉर्डतोड़ सर्दी, दिसंबर-जनवरी में कड़ाके की कोल्ड वेव तय

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मध्य प्रदेश में नवंबर की रेकॉर्डतोड़ सर्दी, दिसंबर-जनवरी में कड़ाके की कोल्ड वेव तय

मध्य प्रदेश में नवंबर की रिकॉर्डतोड़ सर्दी, दिसंबर-जनवरी में भी कड़ाके की ठंड की तैयारी

मध्य प्रदेश में इस बार सर्दी ने नवंबर से ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए दस्तक दी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि दिसंबर और जनवरी में भी कड़ाके की ठंड और कोल्ड वेव जारी रहेगी।

भोपाल में 84 साल का रिकॉर्ड टूटा, इंदौर में 25 साल की सबसे ठंडी रात

नवंबर में राजधानी भोपाल में पारा 5.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 84 साल में सबसे कम तापमान दर्ज किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, 1931 के बाद पहली बार भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो अब तक के सबसे ज्यादा कोल्ड वेव वाले दिन हैं। इससे पहले 30 नवंबर 1941 को यहां न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री दर्ज हुआ था।

इंदौर में भी नवंबर के दौरान तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस तक गिरा, जो इस सीजन की सबसे ठंडी रात रही और पिछले 25 साल में इतना कम पारा पहली बार दर्ज हुआ।

ठंड बढ़ने की वजह: उत्तरी राज्यों में शुरुआती बर्फबारी और ठंडी हवाएं

सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, इस बार नवंबर के पहले सप्ताह में ही उत्तरी राज्यों में बर्फबारी शुरू हो गई, जिसकी वजह से वहां से चलने वाली ठंडी हवाएं सीधे मध्य प्रदेश तक पहुंचीं। महीने के आखिरी सप्ताह में हवाओं की दिशा बदलने से ठंड का असर कुछ कम हुआ, लेकिन कुल मिलाकर नवंबर सामान्य से काफी अधिक ठंडा रहा।

दिसंबर-जनवरी: हर साल की तरह इस बार भी सबसे ठंडे महीने

मौसम विभाग का कहना है कि जिस तरह मानसून के चार महीनों जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में से जुलाई-अगस्त सबसे अधिक बरसात वाले माने जाते हैं, उसी तरह सर्दी के मौसम में दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने रहते हैं। इन्हीं दो महीनों में उत्तर भारत से ठंडी हवाएं ज्यादा मात्रा में मध्य प्रदेश की तरफ आती हैं, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होती है और सर्द हवाएं चलती रहती हैं।

पिछले 10 साल के आंकड़े भी यही बताते हैं कि 20 दिसंबर से कड़ाके की ठंड का दौर शुरू होकर जनवरी तक चलता है। इस अवधि में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के सक्रिय होने से दिसंबर में मावठा यानी ठंडी बरसात भी होती है, जिससे दिन के समय भी सर्दी और बढ़ जाती है।

दिसंबर में मौसम का अनुमान और कोल्ड वेव की अवधि

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दिसंबर में मजबूत वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के आने और उत्तरी हवाएं चलने से दिन और रात दोनों के तापमान में गिरावट होने की संभावना है। अनुमान है कि इस बार भी यह ट्रेंड दोहराया जाएगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव चलेगी और जनवरी में यह स्थिति लगभग 20 से 22 दिन तक बनी रह सकती है। सबसे ज्यादा सर्दी उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में रहने की संभावना है, क्योंकि यहां उत्तरी बर्फीली हवाएं सीधे पहुंचती हैं।

मुख्य शहरों में दिसंबर का ठंड और बारिश का ट्रेंड

भोपाल: कड़ाके की सर्दी और दिसंबर की बरसात

भोपाल में दिसंबर के दौरान दिन और रात दोनों समय ठंड का असर बना रहता है। पिछले 10 साल में से 5 वर्षों में दिसंबर के महीने में यहां आधा से पौन इंच तक बारिश दर्ज की गई है और इस बार भी बरसात की संभावना जताई जा रही है।

तापमान की बात करें तो 11 दिसंबर 1966 की रात में भोपाल का पारा 3.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था, जो अब तक का दिसंबर का ओवरऑल रिकॉर्ड है। हाल के वर्षों में, साल 2021 में दिसंबर के दौरान न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री तक दर्ज किया गया।

इंदौर: रातें 5 से 8 डिग्री के बीच, दिन अपेक्षाकृत गर्म

इंदौर में दिसंबर में सामान्यतः रात का तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले वर्ष यहां न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री तक पहुंचा। बीते 10 साल के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में दिन का अधिकतम तापमान लगभग 28 से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।

इंदौर में दिसंबर में बारिश का भी ट्रेंड है और पिछले 4 साल से इस महीने वर्षा दर्ज हो रही है। 31 दिसंबर 2015 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री तक दर्ज किया गया था। वहीं, 27 दिसंबर 1936 की रात में न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री तक गिरा, जो दिसंबर का रिकॉर्ड न्यूनतम है। वर्ष 1967 में कुल मासिक बारिश 108.5 मिमी (लगभग 4.2 इंच) दर्ज की गई थी, जबकि 17 दिसंबर 2009 को 24 घंटे में 53 मिमी (करीब 2.1 इंच) वर्षा हुई।

ग्वालियर: दिन में हल्की गर्मी, रात में कड़ाके की ठंड

ग्वालियर में दिसंबर में दिन के समय कुछ हद तक गर्माहट और रात में तेज सर्दी का मिश्रित असर दिखता है। पिछले 10 साल में यहां अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जबकि रात का तापमान 1.8 से 6.9 डिग्री के बीच रहा।

लंबे समय के रिकॉर्ड के अनुसार, 6 दिसंबर 2006 को दिन का तापमान 32.1 डिग्री तक पहुंचा था। न्यूनतम तापमान का रिकॉर्ड 26 दिसंबर 1961 का है, जब पारा 0.4 डिग्री सेल्सियस तक गिरा। वर्ष 1997 में दिसंबर की कुल मासिक बारिश 106.6 मिमी (करीब 4.1 इंच) दर्ज की गई, जबकि 13 दिसंबर 2013 को 24 घंटे में सर्वाधिक 32.1 मिमी (लगभग 1.2 इंच) बारिश हुई।

जबलपुर: सर्द दिनों के साथ बारिश का पुराना रिकॉर्ड

जबलपुर में भी दिसंबर में ठंड के साथ बारिश होने का ट्रेंड देखा जाता है। 28 दिसंबर 1960 को यहां दिन का अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं, 28 दिसंबर 1902 को रात का तापमान 0.6 डिग्री दर्ज हुआ, जो दिसंबर का रिकॉर्ड न्यूनतम और ओवरऑल रिकॉर्ड भी माना जाता है।

वर्ष 1885 में दिसंबर की सर्वाधिक मासिक बारिश 125 मिमी (करीब 4.9 इंच) दर्ज की गई थी। 16 दिसंबर 1885 को 24 घंटे में 68.1 मिमी (करीब 2.6 इंच) बारिश का रिकॉर्ड है।

उज्जैन: ठंडी रातें और लगातार दिसंबर की बरसात

उज्जैन में दिसंबर के दौरान दिन का औसत तापमान लगभग 28.2 डिग्री और रात का औसत तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस महीने औसतन 4.6 मिमी बारिश होती है और पिछले पांच साल से यहां दिसंबर में लगातार वर्षा दर्ज की जा रही है।

रिकॉर्ड के अनुसार, 18 दिसंबर 2002 को दिन का अधिकतम तापमान 34.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, जो दिसंबर का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात का तापमान 0.5 डिग्री तक गिरा, जो रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर है। वर्ष 1997 में कुल मासिक बारिश 119.4 मिमी (करीब 4.7 इंच) दर्ज हुई, जबकि 11 दिसंबर 1967 को 24 घंटे में 35.3 मिमी (करीब 1.3 इंच) बारिश हुई थी।

निष्कर्ष: इस बार भी लंबी और तीखी सर्दी की आशंका

पिछले 10 साल के आंकड़ों, नवंबर के रिकॉर्डतोड़ न्यूनतम तापमान और सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के आधार पर मौसम विभाग का अनुमान है कि मध्य प्रदेश में इस बार भी दिसंबर और जनवरी बेहद ठंडे रहेंगे। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर सहित अधिकांश शहरों में रात के तापमान में तेज गिरावट, कई दिनों तक कोल्ड वेव और बीच-बीच में होने वाली बारिश से सर्दी का असर सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

Vivek Singh