मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध
प्रतिबंध का फैसला
मध्य प्रदेश में वनस्पति वसा से बने एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश देश का चौथा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात रवाना होने से पहले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की बैठक में यह निर्णय किया।
इंदौर में पनीर जब्त
इस निर्णय के कुछ घंटे बाद इंदौर के पालदा स्थित उमापति इंडस्ट्रीज से 450 किलो लो-फैट पनीर जब्त किया गया। इसकी कीमत लगभग 1.17 लाख रुपए बताई गई है।
क्या है एनालॉग पनीर
एनालॉग पनीर को असली दूध से बने पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है। इसमें दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है। कम कीमत के कारण बाजार में इसकी खपत तेजी से बढ़ी है।
खपत का अनुमान
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री लगभग 400 क्विंटल होने का अनुमान है। इस हिसाब से राज्य में हर महीने लगभग 9 हजार से 12 हजार क्विंटल यानी 900 से 1200 टन एनालॉग पनीर खपने की बात सामने आई है।
NHRC की नाराजगी
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने एनालॉग पनीर की बिक्री पर नाराजगी जताई है। आयोग ने मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों को पत्र लिखने का फैसला किया है। आयोग राज्यों से इस उत्पाद की बिक्री और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर जानकारी मांग सकता है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एनालॉग पनीर घातक है और एफएसएसएआई को नोटिस देकर पूछा जा रहा है कि इसे बेचने की इजाजत क्यों दी जा रही है।
कानूनगो ने कहा कि अगर सिगरेट पर लिख दिया जाए कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, तो इससे नुकसान बंद नहीं होता। तीन राज्यों की सरकारों के अच्छे निर्णय के बाद अन्य राज्यों को भी निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ एरोबिक स्टार्च वाला टेस्ट करने से एनालॉग पनीर पकड़ में नहीं आता।
Ravi Yadav