पेड़ों में जहरीले रसायन डालकर सूखाने पर NGT सख्त: भोपाल में पर्यावरणीय नुकसान पर आदेश

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पेड़ों में जहरीले रसायन डालकर सूखाने पर NGT सख्त: भोपाल में पर्यावरणीय नुकसान पर आदेश

भोपाल में पेड़ों को रसायन डालकर सूखाने पर NGT का सख्त आदेश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भोपाल में पेड़ों के तनों में छेद कर जहरीले रसायन डालकर उन्हें सूखाने पर नाराजगी जताई है। अधिकरण ने पर्यावरणीय नुकसान को लेकर आदेश जारी किए हैं। यह मामला आवेदक राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई से जुड़ा है।

याचिका में क्या कहा गया?

याचिका में कहा गया कि लोअर लेक के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर के क्षेत्र में हरे-भरे वृक्षों और ग्रीन बेल्ट को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पेड़ों के तनों में छेद कर संदिग्ध रासायनिक और विषैले पदार्थ डाले जा रहे हैं, जिससे वृक्ष सूखकर नष्ट हो रहे हैं।

संयुक्त समिति की जांच

एनजीटी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों वाली संयुक्त समिति गठित की थी। समिति ने निरीक्षण में पाया कि स्थल सिविल लाइन प्रोफेसर कॉलोनी के समीप स्थित निजी भूखंड है। भूखंड के भीतर कुल सात पूर्ण विकसित वृक्ष पाए गए। सभी सात वृक्षों के तनों में ड्रिल किए गए छेद थे। इनमें से दो वृक्ष स्वस्थ और हरे थे, जबकि पांच वृक्ष सूखे और मुरझाए हुए थे। तनों की विस्तृत दृश्य जांच में छेदों के अलावा संदिग्ध अवशेष और निशान मिले, जो रासायनिक पदार्थ के इंजेक्शन की संभावना की ओर संकेत करते हैं।

NGT का आदेश

एनजीटी ने समिति की रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए दर्ज किया कि राज्य प्राधिकारियों ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। अधिकरण ने भोपाल नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यदि वृक्षों को नुकसान पहुंचाया गया है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति या परिसर के स्वामी के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

बाणगंगा नाले का पानी लोअर लेक में

समिति ने निरीक्षण में पाया कि बाणगंगा से लोअर लेक में उल्लेखनीय प्रवाह के साथ पानी पहुंच रहा था। करिश्मा पार्क और कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर के सामने स्थित नालों में निरीक्षण के समय न्यून प्रवाह था। नगर निगम ने इन नालों को मौसमी और वर्षा आधारित बताया था। निरीक्षण के दौरान सॉलिड वेस्ट का जमाव भी पाया गया।

अनुपचारित जल की समस्या

रिपोर्ट में बताया गया कि संबंधित क्षेत्र से लगभग 8 से 10 एमएलडी वेस्ट वॉटर उत्पन्न हो रहा है। इसके उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन या प्रस्तावित है, जिसके दिसंबर 2027 तक पूरा होने की संभावना है। अधिकरण ने कहा कि केवल भविष्य में एसटीपी बनाने का प्रस्ताव वर्तमान पर्यावरणीय दायित्व से मुक्ति का आधार नहीं हो सकता। अनुपचारित सीवेज से होने वाली पर्यावरणीय क्षति के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाना आवश्यक है।

वेटलैंड की इकोलॉजी को नुकसान का मुद्दा

आवेदन में वेटलैंड रूल्स 2017 के उल्लंघन में नई निर्माण गतिविधियों द्वारा वेटलैंड की इकोलॉजी और नेचुरल फॉर्म को नुकसान पहुंचाने का मुद्दा उठाया गया था। आवेदक की ओर से निर्माणों को दर्शाने वाले फोटो प्रस्तुत किए गए। प्रतिवादी पक्ष ने आपत्ति की कि फोटो की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। अधिकरण ने निर्देश दिया कि आवेदन के साथ संलग्न सभी दस्तावेज संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए जाएं।

अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की गई है। तब तक संबंधित अधिकारियों को अपने जवाब, शपथ पत्र और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। भोपाल नगर निगम को शहर के जल और सीवेज प्रबंधन से संबंधित विस्तृत आंकड़े और टाइम बाउंड एक्शन प्लान प्रस्तुत करना होगा।

Vivek Singh