मध्यप्रदेश के 18 जिलों में घना कोहरा, रिकॉर्ड ठंड से ट्रेन-फ्लाइट ठप

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मध्यप्रदेश के 18 जिलों में घना कोहरा, रिकॉर्ड ठंड से ट्रेन-फ्लाइट ठप

मध्यप्रदेश में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड, यातायात और जनजीवन प्रभावित

मध्यप्रदेश के 18 जिलों में घना कोहरा और भीषण ठंड का असर दिख रहा है। कई स्थानों पर सुबह के समय विजिबिलिटी इतनी कम है कि 50 मीटर के बाद कुछ दिखाई नहीं दे रहा। इसके कारण रेल और हवाई सेवाएं प्रभावित हैं और आम जनजीवन पर भी असर पड़ा है।

ट्रेनें और फ्लाइट्स घंटों लेट

भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में 20 से ज्यादा ट्रेनें रोजाना 30 मिनट से लेकर 5 घंटे तक देरी से चल रही हैं। दिल्ली की ओर से आने वाली ट्रेनों पर सबसे अधिक असर है, क्योंकि उत्तरी राज्यों में भी घना कोहरा बना हुआ है। मालवा, झेलम, शताब्दी, सचखंड और पंजाब मेल जैसी कई ट्रेनें तय समय से 8 घंटे तक देरी से पहुंच रही हैं।

भोपाल में मालवा एक्सप्रेस का निर्धारित पहुंचने का समय सुबह 7:25 बजे है, लेकिन शनिवार को यह दोपहर 1:30 बजे पहुंची। इसके चलते उज्जैन और इंदौर में भी इसके समय में देरी हुई। वहीं, भोपाल और इंदौर से उड़ानें भी कोहरे के कारण डिले हो रही हैं। 16 दिसंबर से कोहरे का असर ट्रेनों और फ्लाइट्स पर स्पष्ट रूप से दिखना शुरू हुआ, जिससे जनजीवन प्रभावित है।

कई शहरों में कोहरा, विजिबिलिटी में भारी गिरावट

रीवा में सुबह के समय विजिबिलिटी इतनी कम है कि 50 मीटर के बाद कुछ भी नजर नहीं आता। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया और कटनी में घने कोहरे का असर है।

भोपाल, शाजापुर, देवास, सीहोर, रायसेन और विदिशा में मध्यम कोहरा है, जहां विजिबिलिटी 2 से 4 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई है।

सीजन में पहली बार तापमान 3 डिग्री से नीचे

राज्य में तापमान लगातार गिर रहा है। शुक्रवार-शनिवार की रात के दौरान इस सीजन में पहली बार पारा 3 डिग्री से नीचे पहुंचा। शहडोल के कल्याणपुर में तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सर्दी का अब तक का सबसे कम तापमान है।

उमरिया में 4.3 डिग्री, अनूपपुर के अमरकंटक में 4.6 डिग्री, पचमढ़ी में 5.2 डिग्री, राजगढ़ में 5.4 डिग्री, रीवा में 5.5 डिग्री और मलाजखंड में 5.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। नौगांव में 6.1 डिग्री, रायसेन और छिंदवाड़ा में 6.8 डिग्री, दतिया और सतना में 7.1 डिग्री, मंडला में 7.3 डिग्री, खजुराहो और दमोह में 7.4 डिग्री, बैतूल में 7.5 डिग्री, खंडवा और नरसिंहपुर में 8.4 डिग्री, सागर में 8.9 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, खरगोन में 9.2 डिग्री, सिवनी में 9.4 डिग्री और रतलाम में 9.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

प्रदेश के पांच बड़े शहरों में इंदौर में न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री, भोपाल में 6.2 डिग्री, ग्वालियर में 7.5 डिग्री, उज्जैन में 8.5 डिग्री और जबलपुर में 7.4 डिग्री दर्ज किया गया।

मौसम विभाग की एडवाइजरी: यात्रा, स्वास्थ्य और कृषि पर अलर्ट

लगातार कोहरे और ठंड की स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने यात्रा, कृषि और स्वास्थ्य के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सबसे अधिक फोकस सुरक्षित यात्रा पर है।

यात्रा संबंधी सलाह

विभाग ने लोगों से कम विजिबिलिटी के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। आवश्यक यात्रा के दौरान वाहन चलाते समय फॉग लैंप और लो/बीम हेडलाइट का उपयोग करने तथा धीमी गति से ड्राइविंग करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां

तेज ठंड में शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए सिर, गर्दन, हाथ और पैरों की उंगलियों को अच्छी तरह ढंकने की सलाह दी गई है। फ्लू, सर्दी, खांसी-जुकाम जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करने और विटामिन-सी से भरपूर फल-सब्जियां खाने की बात कही गई है।

कोहरे में मौजूद कणों और प्रदूषकों के संपर्क में आने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है तथा खांसी और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए नियमित व्यायाम के साथ मास्क के उपयोग और शीतलहर की स्थिति में गर्म कपड़े पहनने की हिदायत दी गई है।

किसानों के लिए निर्देश

लंबे समय तक कोहरे के कारण फसलों में अत्यधिक नमी और संभावित रोगों से बचाव के उपाय करने को कहा गया है। पशुशालाओं में उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करने तथा टमाटर, मिर्च, फूलगोभी और सरसों की फसल पर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

जेट स्ट्रीम और वेस्टर्न डिस्टरबेंस से बढ़ी ठंड

वर्तमान में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम सक्रिय है, जिसका असर मध्यप्रदेश पर भी पड़ रहा है। यह तेज हवा जमीन से लगभग 12 से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहती है और इसकी रफ्तार लगभग 194 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है, जो इस बार 222 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच चुकी है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के साथ यह ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा ठंड को और बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से ठंडी हवा और पहाड़ी क्षेत्रों से बर्फीली हवा जब मध्यप्रदेश तक पहुंचती है, तो ठंड तेज हो जाती है। यह सब उत्तर भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है और जेट स्ट्रीम बनने पर ठंड और अधिक बढ़ जाती है।

नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने तोड़े रिकॉर्ड

इस बार नवंबर और दिसंबर दोनों महीनों में सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़े हैं। नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद शीतलहर के सबसे ज्यादा दिन रहे। 17 नवंबर की रात में भोपाल में तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो उस दिन का ओवरऑल रिकॉर्ड रहा।

इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री तक पहुंचा और यह 25 साल में पहली बार इतना नीचे गया। दिसंबर में भी इंदौर में तापमान सबसे कम रहा, जबकि भोपाल में यह 5 डिग्री से नीचे पहुंच चुका है।

दिसंबर-जनवरी: ठंड के सबसे अहम महीने

मौसम विभाग के अनुसार, जैसे मानसून के चार महीनों में जुलाई और अगस्त सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, वैसे ही ठंड के लिए दिसंबर और जनवरी खास होते हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाओं की आवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट और शीतलहर की स्थितियां बनती हैं।

पिछले 10 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय होने से कई बार दिसंबर में बारिश (मावठा) भी होती है, जिससे दिन के समय भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। इस बार भी कई वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर भारत को प्रभावित कर चुके हैं, जिसके कारण मध्यप्रदेश में कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का असर है।

बड़े शहरों का दिसंबर ट्रेंड और रिकॉर्ड

भोपाल

भोपाल में दिसंबर के दौरान कई वर्षों में दिन-रात ठंड और बारिश का मिश्रित ट्रेंड रहा है। पिछले 10 में से 5 साल में दिसंबर के महीने में यहां आधा से पौन इंच तक बारिश हो चुकी है, हालांकि इस बार अभी तक बारिश नहीं हुई है। 11 दिसंबर 1966 की रात में न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री दर्ज किया गया था, जो दिसंबर का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वर्ष 2021 में भी पारा 3.4 डिग्री तक पहुंच चुका है।

इंदौर

इंदौर में दिसंबर के दौरान रात का तापमान आमतौर पर 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले वर्ष यहां न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री तक पहुंचा था। 10 साल के आंकड़ों के अनुसार, दिन का तापमान 28 से 31 डिग्री के बीच रहता है। इस महीने में यहां अक्सर बारिश भी होती है और पिछले 4 साल से दिसंबर में बारिश दर्ज की गई, हालांकि इस बार अब तक बारिश नहीं हुई है।

31 दिसंबर 2015 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। 27 दिसंबर 1936 की रात में न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री रहा, जो रिकॉर्ड है। वर्ष 1967 में दिसंबर की कुल मासिक वर्षा 108.5 मिमी दर्ज की गई, जबकि 17 दिसंबर 2009 को 24 घंटे में 53 मिमी बारिश हुई।

ग्वालियर

ग्वालियर में दिसंबर में दिन के समय अपेक्षाकृत गर्मी और रात में तेज सर्दी रहती है। पिछले 10 साल में यहां अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 1.8 से 6.9 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है। इस साल यहां तेज ठंड के साथ घना कोहरा भी छाया हुआ है।

6 दिसंबर 2006 को दिन का तापमान 32.1 डिग्री तक पहुंच चुका है, जबकि 26 दिसंबर 1961 को न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री तक गिरा था। वर्ष 1997 में दिसंबर में कुल 106.6 मिमी बारिश हुई थी और 13 दिसंबर 2013 को 24 घंटे में 32.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

जबलपुर

जबलपुर में इस बार भी कड़ाके की ठंड का दौर जारी है, हालांकि दिसंबर में अभी तक बारिश नहीं हुई है। 28 दिसंबर 1960 को यहां दिन का अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री दर्ज किया गया था। 28 दिसंबर 1902 की रात में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री रहा, जो यहां का ओवरऑल रिकॉर्ड है।

वर्ष 1885 में दिसंबर में कुल मासिक वर्षा 125 मिमी रही और 16 दिसंबर 1885 को 24 घंटे में 68.1 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।

उज्जैन

उज्जैन में दिसंबर के दौरान दिन का औसत तापमान 28.2 डिग्री और रात का औसत तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस महीने औसतन 4.6 मिमी बारिश होती है। पिछले पांच साल से यहां दिसंबर में बारिश हो रही थी, लेकिन इस बार अब तक एक भी दिन वर्षा नहीं हुई है।

18 दिसंबर 2002 को दिन में तापमान 34.9 डिग्री तक दर्ज किया गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को न्यूनतम तापमान 0.5 डिग्री तक गिरा था। वर्ष 1997 में दिसंबर की कुल मासिक वर्षा 119.4 मिमी रही और 11 दिसंबर 1967 को 24 घंटे में 35.3 मिमी बारिश हुई थी।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में इस समय घने कोहरे और रिकॉर्ड स्तर की ठंड ने जनजीवन, यातायात, स्वास्थ्य और कृषि सभी पर असर डाला है। जेट स्ट्रीम, वेस्टर्न डिस्टरबेंस और उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाओं के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने, सुरक्षित यात्रा करने, स्वास्थ्य का ध्यान रखने और फसलों व पशुओं की विशेष देखभाल करने की सलाह दी है।

Lokendra Mishra