मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, मंदसौर 2.5 डिग्री तक गिरा पारा, कोल्ड वेव अलर्ट

· 1 min read
मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, मंदसौर 2.5 डिग्री तक गिरा पारा, कोल्ड वेव अलर्ट

मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, कई जिलों में पारा लुढ़का और शीतलहर का असर

उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं और पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट रिकॉर्ड की गई है और कोहरा तथा शीतलहर की स्थिति बनी हुई है।

मंदसौर सबसे ठंडा, कई शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे

मंदसौर में न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। कटनी के करौंदी में 2.7 डिग्री, शाजापुर में 3.3 डिग्री, शहडोल के कल्याणपुर में 3.5 डिग्री और पचमढ़ी में 3.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजगढ़ में 4.5 डिग्री, उमरिया में 5.3, मंडला में 5.6, रीवा में 5.8, मलाजखंड में 6.1, जबकि दतिया, रायसेन और नौगांव में 6.8 डिग्री दर्ज हुआ। अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान लगभग 10 डिग्री या उससे कम रहा।

बड़े शहरों में ग्वालियर में 5.9 डिग्री, भोपाल में 6 डिग्री, इंदौर में 6.2 डिग्री, उज्जैन में 7.5 डिग्री और जबलपुर में 8.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

कोहरा छाया, विजिबिलिटी घटी और ट्रेनों की रफ्तार पर असर

शनिवार सुबह 15 से अधिक जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे की स्थिति रही। राजगढ़ में घना कोहरा दर्ज किया गया जहां विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर के बीच रही। भोपाल, दतिया, ग्वालियर, सतना, रीवा और खजुराहो में दृश्यता लगभग 1 किलोमीटर, जबकि उज्जैन, रतलाम, इंदौर, नर्मदापुरम, गुना, दमोह, मंडला, नौगांव और सागर में 1 से 2 किलोमीटर के बीच रही। कई अन्य शहरों में भी हल्का कोहरा छाया रहा।

ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों जैसे ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया। इंदौर, भोपाल, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के शहरों में भी कोहरे का प्रभाव देखने को मिला, जिससे दृश्यता कम रही।

कम विजिबिलिटी का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा। दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली कई ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं। मालवा, झेलम और सचखंड एक्सप्रेस सहित पंजाब मेल, जनशताब्दी समेत लगभग एक दर्जन ट्रेनें कोहरे से प्रभावित हुई हैं।

जेट स्ट्रीम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से मौसम में बदलाव

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम-उत्तर भारत के ऊपर मध्य समुद्र तल से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर लगभग 240 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही हैं। आसमान में नदी की तरह बहने वाली यह तेज हवाएं मध्यप्रदेश के मौसम को भी प्रभावित कर रही हैं।

16 जनवरी से सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आगे बढ़ चुका है और अब 19 जनवरी से उत्तर-पश्चिम भारत पर नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, नए सिस्टम के प्रभाव से अगले 2 से 3 दिनों तक प्रदेश में तेज ठंड बनी रह सकती है और बाद में बादल छाने तथा बारिश की स्थिति भी बन सकती है। यदि यह सिस्टम मजबूत रहा तो 20–21 जनवरी के बाद मध्यप्रदेश में बादल और वर्षा वाला मौसम देखने को मिल सकता है।

इस बार ठंड ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

इस बार नवंबर और दिसंबर में मध्यप्रदेश में पड़ी ठंड ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। नवंबर में 84 साल की सबसे कड़ी सर्दी दर्ज की गई, जबकि दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। जनवरी में भी कड़ाके की ठंड जारी है और भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी में कई स्थानों पर तापमान माइनस के करीब या उससे नीचे भी रिकॉर्ड हो चुका है। इस बार तेज सर्दी, घना कोहरा और शीतलहर का दौर एक साथ देखने को मिल रहा है।

जनवरी और ठंड का पैटर्न

मौसम विभाग का कहना है कि जैसे मानसून के चार महीनों में से जुलाई और अगस्त सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, वैसे ही कड़ाके की ठंड के लिए दिसंबर और जनवरी खास माने जाते हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से ठंडी हवाएं अधिक मात्रा में आती हैं, जिसके कारण तापमान में तेज गिरावट होती है और सर्द हवाएं चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े भी इसी रुझान की पुष्टि करते हैं।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के सक्रिय होने से जनवरी में मावठा (फरवरी से पहले की सर्द बारिश) भी होती है। पिछले साल कई जिलों में जनवरी के दौरान बारिश दर्ज की गई थी और इस साल भी वर्ष की शुरुआत में ही बादल छाए रहे।

भोपाल में जनवरी की सर्दी और बारिश के रिकॉर्ड

भोपाल में जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड के साथ दिन में कभी-कभी गर्मी जैसा एहसास और बारिश दोनों देखने को मिलते हैं। 18 जनवरी 1935 को रात का न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो रिकॉर्ड है। वहीं 26 जनवरी 2009 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था।

पिछले 10 वर्षों में से 7 साल जनवरी में बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सबसे अधिक 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को दर्ज की गई, जबकि जनवरी 1948 में सर्वाधिक मासिक 3.8 इंच वर्षा हुई थी।

इंदौर में माइनस तापमान और वर्षा के आंकड़े

इंदौर में जनवरी के महीने में सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 को न्यूनतम तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो वहां का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 27 जनवरी 1990 को दिन का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

इंदौर में 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है, जब 3 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। उसी वर्ष जनवरी में कुल लगभग 4 इंच मासिक बारिश हुई थी।

जबलपुर में ठंड और बारिश का इतिहास

जबलपुर में भी जनवरी में ठंड और बारिश दोनों का ट्रेंड स्पष्ट है। 7 जनवरी 1946 को रात का पारा 1.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था, जो वहां का उल्लेखनीय रिकॉर्ड है। 7 जनवरी 1973 को दिन का अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

24 जनवरी 1919 को 24 घंटे में 2.5 इंच वर्षा हुई थी और उसी वर्ष पूरे जनवरी महीने में 8 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई थी।

ग्वालियर–चंबल: उत्तरी हवाओं से सबसे अधिक ठंडा क्षेत्र

उत्तरी हवाओं के सीधे प्रभाव के कारण ग्वालियर–चंबल क्षेत्र को प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में गिना जाता है। पिछले 10 साल के रिकॉर्ड के अनुसार, 2018 में ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।

ग्वालियर में जनवरी में बारिश भी अक्सर होती रही है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच 9 साल जनवरी में बारिश दर्ज की गई। 8 जनवरी 1926 को 24 घंटे में 2.1 इंच वर्षा का रिकॉर्ड है, जबकि 1948 में जनवरी के दौरान कुल 3.1 इंच बारिश हुई थी।

उज्जैन में शून्य डिग्री तक गिरा तापमान

उज्जैन में भी उत्तरी हवा के प्रभाव के कारण कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को यहां न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। पिछले 10 वर्षों में यहां तापमान 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस के बीच कई बार रिकॉर्ड किया जा चुका है।

उज्जैन में 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 को बना, जब लगभग सवा इंच वर्षा हुई थी। वर्ष 1994 में जनवरी के महीने में कुल 2.2 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

निष्कर्ष: अगले दिनों में भी ठंड और बदले हुए मौसम की संभावना

कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश इस समय कड़ाके की ठंड, कोहरे और शीतलहर की चपेट में है। कई स्थानों पर पारा सामान्य से काफी नीचे है और यातायात सहित सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक ठंड तेज बनी रहेगी और नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादल छाने तथा बारिश की संभावना भी है, जिससे मौसम में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Vivek Singh