महाकुंभ की सुंदर साध्वी हर्षा ने छोड़ा धर्म प्रचार, धमकियां और धर्म परिवर्तन ऑफर

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महाकुंभ की सुंदर साध्वी हर्षा ने छोड़ा धर्म प्रचार, धमकियां और धर्म परिवर्तन ऑफर

महाकुंभ में चर्चित हुई साध्वी हर्षा रिछारिया ने छोड़ा धर्म प्रचार

प्रयागराज महाकुंभ में चर्चित हुईं साध्वी हर्षा रिछारिया ने धर्म प्रचार छोड़ने की घोषणा के बाद मिल रही धमकियों और धर्म परिवर्तन के प्रस्तावों को लेकर अपना दर्द साझा किया है। उन्होंने कहा कि वह मानसिक पीड़ा झेल रही हैं, लेकिन सनातन धर्म नहीं छोड़ेंगी।

वीडियो के बाद बढ़ा विवाद और धमकियां

हर्षा रिछारिया हाल ही में सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो के कारण सुर्खियों में आईं, जिसमें उन्होंने भारी मन से धर्म प्रचार का काम छोड़कर अपने पुराने प्रोफेशन एंकरिंग में लौटने की घोषणा की। उनका कहना है कि इस घोषणा के बाद से लगातार उन्हें धमकियां दी जा रही हैं, गालियां दी जा रही हैं और गंदे कमेंट किए जा रहे हैं। अलग-अलग धर्मों के लोग उन्हें अपने धर्म के बारे में पढ़ने और अपनाने के संदेश भेज रहे हैं।

महाकुंभ में मिली प्रसिद्धि और शुरू हुआ विवाद

4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ के दौरान निरंजनी अखाड़े की भव्य पेशवाई में हर्षा संतों के साथ रथ पर सवार नजर आई थीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और लोगों ने उन्हें महाकुंभ की सबसे सुंदर साध्वी कहना शुरू कर दिया। इसी के साथ वह इंटरनेट सेंसेशन बन गईं।

इस लोकप्रियता के साथ विवाद भी शुरू हो गए। शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज सहित कुछ धार्मिक गुरुओं ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह का प्रदर्शन उचित नहीं है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उनके मुताबिक धर्म को प्रदर्शन का हिस्सा बनाना खतरनाक है। यहीं से हर्षा के लिए मुश्किलों का दौर शुरू हुआ।

संत समाज में स्वीकृति न मिलने का आरोप

हर्षा का कहना है कि प्रसिद्धि मिलने के बाद भी उन्हें संत समाज में स्वीकार्यता नहीं मिली। उनके अनुसार, जब भी वह किसी संत से मिलने जातीं तो उन्हें घंटों इंतजार करवाया जाता। उनके पुराने एंकरिंग प्रोफेशन को गंदी नजर से देखा जाता और उन्हें ऐसा महसूस कराया जाता जैसे उन्होंने अतीत में कोई बड़ा पाप किया हो।

हर्षा कहती हैं कि उन्हें अपने पुराने प्रोफेशन पर गर्व है, क्योंकि उसी ने उन्हें पहचान दी। उन्होंने दावा किया कि सब छोड़कर धर्म का रास्ता चुनने के बाद भी उन्हें समर्थन की जगह संदेह ही मिला। उनका आरोप है कि उनके ही धर्मगुरु उन पर शक करते हैं और उन्हें सफाई देनी पड़ती है। उनके अनुसार, धर्म में एकता की कमी है और कई लोगों में अहंकार भरा हुआ है।

धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने और अश्लील संदेशों का आरोप

धर्म प्रचार छोड़ने की घोषणा के बाद उत्पीड़न बढ़ने की बात भी हर्षा ने कही। उन्होंने बताया कि उन्हें न केवल दूसरे धर्मों के कुछ लोगों से, बल्कि अपने ही धर्म के तथाकथित ठेकेदारों से भी धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं। उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया जा रहा है। इसके साथ ही अश्लील संदेशों और गालियों का सिलसिला चल रहा है।

हर्षा के मुताबिक, लोग आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें नाम और शोहरत मिल गई, इसलिए अब वह सब छोड़ रही हैं। वह कहती हैं कि जो लोग खुद को बहनों का रक्षक बताते हैं, वही अब उनके खिलाफ खड़े हैं और दूसरे धर्म के लोगों को भी उन्हें गाली देने और धमकाने का रास्ता दिखा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वह सनातनी हैं और हमेशा रहेंगी, लेकिन मानसिक पीड़ा और अपमान को अब और सहन नहीं कर पा रही हैं।

माघ मेले में जमीन न मिलने का मामला आखिरी चोट

हर्षा के अनुसार, दिसंबर 2025 में माघ मेले के दौरान एक घटना उनके लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई। उन्होंने मेले में अपना शिविर लगाने के लिए जमीन आवंटन का आवेदन किया। शुरुआत में अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया और प्रक्रिया को मंजूरी भी दे दी।

हर्षा का आरोप है कि जैसे ही कुछ प्रभावशाली संतों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने अधिकारियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि उन्हें जमीन न दी जाए। इसके बाद, अधिकारियों ने उनके फोन उठाने बंद कर दिए और उनसे मिलना भी छोड़ दिया। अंततः उन्हें जमीन नहीं मिल पाई। वह कहती हैं कि उन्होंने कभी श्रद्धालुओं से पैसा नहीं लिया और सारी व्यवस्था अपने खर्च पर करती थीं। इस घटना को उन्होंने अपने लिए आखिरी चोट बताया।

युवाओं और महिलाओं के लिए संदेश, भविष्य को लेकर संकेत

अपने अनुभव से सीख लेकर हर्षा ने युवाओं और महिलाओं को सलाह दी कि यदि वे धर्म से जुड़ना चाहते हैं तो परिवार और घर के मंदिर तक ही सीमित रहें और किसी के पीछे अंधे होकर न चलें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल धर्म का प्रचार छोड़ने का फैसला लिया है, सनातन धर्म नहीं छोड़ा है। साथ ही, हर्षा ने कहा कि यदि भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं और कोई चमत्कार होता है, तो वह दोबारा इस मार्ग पर लौटने से पीछे नहीं हटेंगी।

Navjeet Kaur