मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव तैयार, संसद में पेश करने की तैयारी
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने हेतु सांसदों के हस्ताक्षर जुटा लिए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव गुरुवार या शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – में पेश किया जा सकता है।
विपक्ष का आरोप: CEC सत्तारूढ़ सरकार को फायदा पहुंचा रहे हैं
विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कई अवसरों पर सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने में मदद कर रहे हैं, विशेषकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नामक मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर। विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया केंद्र सरकार को लाभ पहुंचाने के लिए की जा रही है। इस प्रक्रिया को लेकर पश्चिम बंगाल में विशेष रूप से चिंता जताई गई है, जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहा है।
प्रस्ताव का विवरण और प्रक्रिया
एक वरिष्ठ सांसद ने पुष्टि की है कि हस्ताक्षर जुटाने का काम पूरा हो गया है। लोकसभा में प्रस्ताव देने के लिए लगभग 120 सांसदों और राज्यसभा में लगभग 60 सांसदों ने इस नोटिस पर दस्तखत किए हैं। नियमानुसार, लोकसभा में 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के दस्तखत जरूरी होते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह नोटिस INDIA गठबंधन के सभी दलों के सांसदों ने मिलकर साइन किया है। यह पहली बार है जब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए ऐसा नोटिस दिया जा रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश आवश्यक होती है। जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के अनुसार, यदि दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जाँच समिति तभी बनेगी जब दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन मिलकर एक संयुक्त जाँच समिति बनाएंगे।
CEC का बयान और पश्चिम बंगाल में स्थिति
हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार (10 मार्च) को कहा था कि किसी भी पात्र वोटर का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिकता है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी सही वोटर को वोट देने का अधिकार मिले और कोई अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल न हो। CEC के इस बयान के बाद ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना धरना समाप्त किया था।
Sachin Saxena