छतरपुर के नौगांव में पारा 2.5 डिग्री, पाले से फसलों पर खतरा
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव क्षेत्र में इस सर्दी के मौसम का अब तक का सबसे कम न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। कड़ाके की ठंड और शीत लहर के कारण आम जनजीवन पर असर दिख रहा है, वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।
प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल नौगांव
नौगांव इस समय प्रदेश के सबसे ठंडे स्थानों में शामिल हो गया है। तापमान में अचानक आई गिरावट के कारण सुबह और रात के समय लोगों को तीखी ठिठुरन का सामना करना पड़ रहा है। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बढ़ गया है।
फसलों पर पाले का बढ़ता खतरा
गिरते तापमान की वजह से खेतों में खड़ी फसलों पर पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में आसमान पर बादल छाए रह सकते हैं और जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। ऐसी स्थिति में ठंड और बढ़ने तथा फसलों पर पाले के खतरे में इजाफा होने की संभावना है।
नौगांव में ज्यादा ठंड के वैज्ञानिक कारण
कृषि मौसम वैज्ञानिक हेमंत कुमार सिन्हा के अनुसार, नौगांव में अधिक ठंड पड़ने के पीछे इसकी भौगोलिक स्थिति प्रमुख कारण है। यह बुंदेलखंड के पठारी क्षेत्र में स्थित है, जहां घने जंगलों की कमी और खुले मैदानों की अधिकता के कारण रात के समय जमीन की ऊष्मा तेजी से अंतरिक्ष में चली जाती है। इस प्रक्रिया को रेडिएशन कूलिंग कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही उत्तर भारत से सीधे आने वाली शीत लहर और नौगांव क्षेत्र में शहरीकरण की कमी भी तापमान को नीचे ले जाने में भूमिका निभाती है। इन कारणों से नौगांव में ठंड का प्रभाव अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक दिखाई देता है।
किसानों के लिए पाले से बचाव की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पाले से फसलों की सुरक्षा के लिए रात के समय हल्की सिंचाई करें, ताकि खेतों का तापमान कुछ हद तक नियंत्रित रहे। इसके अलावा खेतों की मेड़ों पर कचरा जलाकर धुआं करने को कहा गया है, जिससे पाले का प्रभाव कम हो सकता है।
विशेषज्ञों ने निर्धारित मात्रा में सल्फर या थायोयूरिया का छिड़काव करने की भी सिफारिश की है, ताकि फसलों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके। किसानों से अपील की गई है कि वे समय पर इन उपायों को अपनाएं और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखें।
पिछले साल से ज्यादा सर्दी का प्रकोप
तुलनात्मक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 की तुलना में इस वर्ष 2025-26 में सर्दी का प्रकोप अधिक देखा जा रहा है। ठंड की इस बढ़ी हुई तीव्रता के बीच कृषि विशेषज्ञ किसानों से विशेष सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं, ताकि पाले से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।
जानकारों का मानना है कि समय रहते सही बचाव उपाय अपनाने और मौसम की जानकारी पर लगातार नजर रखने से किसान अपनी फसलों की सुरक्षा बेहतर तरीके से कर सकते हैं और उत्पादन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को घटा सकते हैं।
Ravi Yadav