नीतीश मंत्रिमंडल में वंशवाद के 10 चेहरे, परिवारवाद पर उठे सवाल

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नीतीश मंत्रिमंडल में वंशवाद  के 10 चेहरे, परिवारवाद पर उठे सवाल

नीतीश मंत्रिमंडल में वंशवाद के 10 प्रमुख चेहरे

बिहार में नई सरकार ने परिवारवाद खत्म करने का वादा किया, लेकिन मंत्रिमंडल में 10 ऐसे चेहरे शामिल किए गए हैं जो पारिवारिक राजनीतिक विरासत से जुड़े हैं। विपक्ष ने इसे "वंशवाद की नर्सरी" करार दिया है।

दीपक प्रकाश: बिना चुनाव लड़े मंत्री

दीपक प्रकाश, उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और सासाराम विधायक स्नेहलता कुशवाहा के पुत्र हैं। उन्हें बिना चुनाव लड़े मंत्री बनाया गया। उनकी नियुक्ति कुशवाहा जाति के वोट बैंक को साधने की रणनीति है।

सम्राट चौधरी: शकुनी चौधरी के वारिस

भाजपा नेता सम्राट चौधरी, पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी के बेटे हैं। उनका राजनीतिक करियर भाजपा की पिछड़े वर्गों की रणनीति का हिस्सा बन चुका है।

श्रेयसी सिंह: दिग्विजय सिंह की बेटी

श्रेयसी सिंह, पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं। नवादा सीट जीतकर उन्होंने महिलाओं और युवाओं में प्रभाव बढ़ाया, भाजपा ने उन्हें महिला नेतृत्व का चेहरा बनाया।

रमा निषाद: तीसरी पीढ़ी का नेतृत्व

रमा निषाद, कैप्टन जय नारायण निषाद की बहू और अजय निषाद की पत्नी हैं। भाजपा ने उन्हें निषाद समुदाय में महिला नेतृत्व को बढ़ाने के लिए चुना।

अन्य चेहरे और वंशवादी राजनीति

विजय चौधरी, अशोक चौधरी, नितिन नवीन, सुनील कुमार, लेसी सिंह, और संजय सिंह टाइगर जैसे नेता भी पारिवारिक राजनीतिक विरासत से जुड़े हैं। क्षेत्रीय पार्टियों में वंशवाद की बढ़ती प्रवृत्ति को विपक्ष ने आलोचना का विषय बनाया है।

क्षेत्रीय पार्टियों में वंशवाद का कारण

बिहार में छोटी पार्टियों के टूटने का डर और जातीय अस्मिता की रक्षा के लिए परिवारवाद बढ़ा है। उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी, लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान जैसे नेताओं ने अपनी पार्टियों में परिवार को प्रमुख स्थान दिया है।

निष्कर्ष

बिहार की राजनीति में परिवारवाद और जातिगत समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। क्षेत्रीय पार्टियों में लोकतंत्र की चुनौती और वंशवादी राजनीति का बढ़ता प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

Amit Pateria