पानीपत में RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा शुरू, BJP अध्यक्ष पहली कतार में मौजूद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा शुक्रवार को हरियाणा के पानीपत में शुरू हो गई। यह RSS की सर्वोच्च निर्णायक इकाई है और इसकी बैठक पानीपत में तीन दिनों तक चलेगी। RSS प्रमुख मोहन भागवत इस सभा के लिए सात दिन पहले ही पानीपत पहुंच गए थे। संघ को नया स्वरूप देने की चर्चाओं के बीच यह सभा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
केरल में मुस्लिम-ईसाई परिवारों से संपर्क और चुनावी रणनीति पर जोर
गृह संपर्क पर प्रस्तुत एक रिपोर्ट में RSS ने दावा किया कि केरल में एक लाख से अधिक मुस्लिम व ईसाई परिवारों से संपर्क किया गया और उनसे अच्छा प्रतिसाद मिला। इसके अतिरिक्त, हिंदू सम्मेलनों का भी लाभ मिला। इस साल केरल में चुनाव होने हैं, और भाजपा दक्षिण के राज्यों पर अपना ध्यान बढ़ा रही है।
बैठक के पहले दिन मंच पर RSS प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ही बैठे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को मंच से नीचे पहली कतार में कुर्सी पर जगह मिली। नबीन भी तीनों दिन इस सभा में मौजूद रहेंगे। सभा शुरू होने के बाद मीडिया को केवल आठ मिनट के लिए प्रवेश दिया गया, जिसके बाद देश भर से संघ और उसकी विचारधारा से जुड़े 32 संगठनों के 1487 प्रतिनिधि ही हॉल में उपस्थित रहे।
शताब्दी वर्ष के कार्यों और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि पहले दिन RSS के शताब्दी वर्ष में हुए कार्यों पर चर्चा हुई। दूसरे दिन RSS के प्रकल्पों में आई चुनौतियों पर विचार-विमर्श होगा और अगले एक साल में किए जाने वाले कार्यों की रूपरेखा तय की जाएगी।
आरएसएस में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी इकाई है, जिसमें संघ के सभी कार्यों की समीक्षा होती है और भविष्य की रूपरेखा तय होती है। यह सभा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले दो वर्षों में नौ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव होने हैं। प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष में देशभर में 5500 से अधिक नई शाखाएं शुरू हुई हैं। डिजिटल माध्यम से भी संघ से जुड़ने का रुझान बढ़ रहा है, जहां हर साल लगभग 1.25 लाख लोग 'ज्वाइन RSS' के माध्यम से जुड़ रहे हैं।
सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने जानकारी दी कि गृह संपर्क अभियान के तहत केरल में 55 हजार से अधिक मुस्लिम और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों से संपर्क किया गया। देशभर में 36000 से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए।
संरचनात्मक बदलाव और अनुसूचित समाज पर ध्यान
RSS से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संघ अपने ढांचे में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। इसमें क्षेत्र प्रचारकों की संख्या कम करने और जिला, तहसील, ब्लॉक व गांवों तक कार्यकर्ताओं को अधिक अधिकार देने की योजना है। इस प्रस्ताव को सभा के समक्ष रखा जाएगा ताकि संघ की ताकत निचले स्तर तक पहुंचाई जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, अगले दो साल में नौ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। इसी साल पश्चिम बंगाल, दक्षिण भारत में तमिलनाडु व केरल महत्वपूर्ण हैं, जबकि 2027 में उत्तर प्रदेश व पंजाब अहम हैं। इन चुनावों को लेकर RSS सूक्ष्म प्रबंधन रणनीति और संरचना पर जोर दे रही है, क्योंकि ये चुनाव अगले लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल माने जा रहे हैं।
समाज में संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, खासकर अनुसूचित समाज पर। विजयादशमी उत्सव, गृहसंपर्क, हिन्दू सम्मेलन, युवा सम्मेलन, प्रमुख नागरिक गोष्ठी और सामाजिक सद्भाव बैठकों की रिपोर्ट इस सभा में रखी जाएगी। इन आयोजनों में आई चुनौतियों और आवश्यक बदलावों पर अहम फैसले हो सकते हैं। अनुसूचित समाज को साथ लाने के कार्य पर विशेष चर्चा होगी। संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के आयोजन इसी कड़ी का हिस्सा हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में एससी वोटर के भाजपा से दूर होने से, खासकर उत्तर प्रदेश में, पार्टी को नुकसान हुआ था।
आरएसएस सूत्रों के अनुसार, बैठक के मुख्य बिंदुओं में संघ का शताब्दी वर्ष (2025-26) केंद्र में रहेगा। शताब्दी वर्ष के तहत अब तक देशभर के 10 करोड़ से अधिक घरों तक संघ की पहुंच हो चुकी है। बैठक में संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के कार्यक्रमों पर भी चर्चा होगी, जो अगले साल 20 फरवरी तक पूरे देश में समरसता के संदेश के साथ मनाए जाएंगे।
अंतिम दिन मोहन भागवत का संबोधन और निर्णयों की जानकारी
सभा के अंतिम दिन, 15 मार्च को, RSS प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन होगा। उसके बाद, दत्तात्रेय होसबाले सभा में हुए निर्णयों और पारित प्रस्तावों की आधिकारिक जानकारी मीडिया में साझा करेंगे।
Navjeet Kaur