पुणे PMC चुनाव से पहले MVA में दरार, कांग्रेस-उद्धव शिवसेना साथ, NCP गुट अलग

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पुणे PMC चुनाव से पहले MVA में दरार, कांग्रेस-उद्धव शिवसेना साथ, NCP गुट अलग

पुणे नगर निगम चुनाव से पहले महा विकास आघाड़ी में दरार और नई सियासी जमावट

पुणे नगर निगम (PMC) और पिंपरी चिंचवाड़ महानगर पालिका चुनाव से पहले महाराष्ट्र की महा विकास आघाड़ी (MVA) में गंभीर मतभेद उभरते दिख रहे हैं। एक ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार और अजित पवार गुट स्थानीय निकाय चुनाव के लिए साथ आने की कोशिश में हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने अलग रणनीति बनाकर एक-दूसरे के साथ गठबंधन का फैसला किया है।

शरद पवार और अजित पवार गुट में सीट बंटवारे की बातचीत

रिपोर्टों के अनुसार पुणे महानगरपालिका चुनाव को लेकर NCP के दोनों गुटों के बीच गुरुवार को बैठक हुई, जिसमें सीट शेयरिंग पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि शरद पवार की पार्टी ने 40 से 45 सीटों की मांग की है, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाला NCP गुट 30 सीटें देने पर सहमत दिख रहा है। अंतिम फैसला अजित पवार और सुप्रिया सुले द्वारा किए जाने की बात कही गई है। इस प्रक्रिया के चलते स्थानीय स्तर पर MVA की एकजुटता कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया

इस स्थिति को देखते हुए महा विकास आघाड़ी के अन्य दो घटक दल, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT), ने पुणे नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ने का निर्णय लिया है। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 जनवरी को होने वाले पुणे PMC चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस ने शिवसेना (UBT) को औपचारिक गठबंधन प्रस्ताव भी भेज दिया है और सीटों के बंटवारे पर अंतिम सहमति जल्द बनने की संभावना जताई जा रही है।

पुणे नगर निगम में कुल 41 वार्ड और 165 पार्षद सीटें हैं। इन्हीं सीटों पर कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच समझौते की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कांग्रेस नेता मोहन जोशी के अनुसार, मुंबई में हुई पार्टी की कोर कमेटी बैठक में शिवसेना (UBT) के साथ गठबंधन का फैसला लिया जा चुका है और सीट बंटवारे पर जल्द निर्णय होने की उम्मीद है।

MNS को भी गठबंधन में शामिल करने की संभावना

सूत्रों के मुताबिक इस संभावित गठबंधन में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को भी कुछ सीटें दी जा सकती हैं। पहले शिवसेना (UBT) ने MNS के साथ गठबंधन की संभावना पर भी विचार किया था। ऐसे में कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और MNS के एक साथ आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।

कांग्रेस ने अजित पवार गुट के साथ गठबंधन से किया इंकार

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी अजित पवार गुट के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उनका मानना है कि ऐसा समझौता पार्टी के दीर्घकालिक हितों के अनुकूल नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ समय पहले अजित पवार ने फोन कर पुणे में कांग्रेस के साथ गठबंधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कांग्रेस ने इसे ठुकरा दिया।

2017 के PMC चुनाव से सबक और वर्तमान चुनौतियां

कांग्रेस 2017 के पुणे नगर निगम चुनाव का उदाहरण देते हुए कहती है कि तब पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ा था और 85 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद केवल 10 सीटें ही जीत पाई थी। इस बार कांग्रेस उस गलती को दोहराना नहीं चाहती और मजबूत गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरने की नीति अपना रही है।

इसी बीच विपक्षी गठबंधन के सामने चुनौती भी बढ़ गई है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विभिन्न दलों के 22 पूर्व पार्षदों और पदाधिकारियों को अपने साथ जोड़ लिया है। इसके चलते कांग्रेस और उसके संभावित सहयोगी दलों को नए उम्मीदवारों की तलाश करनी पड़ रही है।

आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी अंतिम रणनीति

कुल मिलाकर पुणे नगर निगम चुनाव से पहले महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। एक तरफ NCP के दोनों गुट सीट बंटवारे के जरिए साथ आने की कोशिश में हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस और शिवसेना (UBT) अपने साझा गठबंधन को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। MNS की संभावित भागीदारी और BJP की सक्रियता के बीच, आने वाले कुछ दिनों में यह स्पष्ट होगा कि पुणे PMC चुनाव में विपक्ष की अंतिम रणनीति क्या रूप लेगी और MVA के भीतर की वर्तमान खींचतान किस दिशा में जाती है।

Lokendra Mishra