राम मंदिर चंदा, अद्वैत वेदांत और सियासत: दिग्विजय सिंह के बयान पर विवाद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद तथा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर दर्शन पर पूछे गए सवाल के जवाब में अपने अद्वैत वेदांत के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनके हृदय में ही नारायण विराजमान हैं। उनके इस बयान पर भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उन पर राजनीतिक और धार्मिक रूप से तीखा हमला किया।
अद्वैत वेदांत पर प्रवचन, ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का ज़िक्र
दिग्विजय सिंह भोपाल में अद्वैत वेदांत पर उज्जैन संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु का प्रवचन आयोजित करने जा रहे हैं। यह कार्यक्रम 25 जनवरी को भोपाल में होगा, जिसकी जानकारी उन्होंने स्वयं दी। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने राम मंदिर के लिए चंदा दिया है, तो वे अयोध्या जाकर राम मंदिर के दर्शन कब करेंगे, इस पर उन्होंने कहा कि वे आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत का अध्ययन कर रहे हैं।
उन्होंने अद्वैत वेदांत की व्याख्या करते हुए ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का उल्लेख किया और कहा कि उनके भीतर ही ब्रह्म हैं, इसलिए उन्हें कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है। दिग्विजय सिंह के अनुसार, उनके हृदय में ही नारायण विराजमान हैं।
भोपाल सांसद आलोक शर्मा की प्रतिक्रिया
दिग्विजय सिंह के इस बयान पर भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सभी के आदर्श और श्रद्धा के केंद्र हैं। आलोक शर्मा ने सवाल उठाया कि अगर दिग्विजय सिंह अयोध्या में राम मंदिर नहीं जाएंगे, तो क्या वे दिल्ली की जामा मस्जिद या मक्का-मदीना जाएंगे।
आलोक शर्मा ने आरोप लगाया कि देश की जनता दिग्विजय सिंह और उनकी पार्टी के बारे में बहुत कुछ समझती है, इसी कारण उनकी और उनकी पार्टी की राजनीतिक स्थिति खराब हो रही है। उन्होंने मांग की कि ऐसे बयानों के लिए दिग्विजय सिंह को सनातन समाज से माफी मांगनी चाहिए।
राम मंदिर के लिए दिया गया चंदा और पारदर्शिता की मांग
जनवरी 2021 में दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 1,11,111 रुपये का चेक भेजा था। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा था।
अपने पत्र में दिग्विजय सिंह ने अपील की थी कि राम मंदिर के नाम पर चंदा संग्रह सौहार्दपूर्ण और पारदर्शी माहौल में किया जाए, ताकि समाज में किसी प्रकार का तनाव या विभाजन न हो। उन्होंने यह भी कहा था कि आस्था से जुड़े इस विषय में सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने पत्र के माध्यम से विश्व हिंदू परिषद द्वारा पूर्व में एकत्र किए गए चंदे का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग भी की थी। उनका तर्क था कि चंदे की पारदर्शिता से लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। उस समय देश भर में राम मंदिर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर चंदा अभियान चल रहा था और उनका यह कदम आस्था के सम्मान के साथ-साथ जवाबदेही और पारदर्शिता के संदर्भ में चर्चा में रहा।
मंदिरों की जमीन की नीलामी पर भाजपा सरकार पर हमला
दिग्विजय सिंह ने मंदिरों की माफी भूमि की नीलामी के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि जो लोग उन्हें मुसलमान बताते हैं, वही आज मंदिरों और सरकारी जमीनों पर कब्जा किए बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म का ठेका लेकर घूमते हैं, वही सबसे ज्यादा धर्म विरोधी काम कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में मांग की कि मंदिरों की जमीन नीलाम कराने का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि यह संविधान, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सनातन परंपराओं—तीनों का उल्लंघन है।
निष्कर्ष
राम मंदिर के लिए चंदा देने, अद्वैत वेदांत के अध्ययन और अयोध्या न जाने के बयान ने दिग्विजय सिंह को एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर वे आस्था, पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों का हवाला देते हुए भाजपा सरकार और उससे जुड़े संगठनों पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा नेता आलोक शर्मा उनके रुख को लेकर उन पर निशाना साध रहे हैं। यह पूरा विवाद राम मंदिर, धार्मिक आस्था और राजनीति के बीच चल रही खींचतान को एक बार फिर सामने लाता है।
Navjeet Kaur