राष्ट्रभक्ति का मतलब सिर्फ नारा नहीं, समाजसेवा से होता है: RSS नेता

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राष्ट्रभक्ति  का मतलब सिर्फ नारा नहीं,  समाजसेवा  से होता है: RSS नेता

राष्ट्रभक्ति का अर्थ और समाज को जोड़ने की अपील

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने जयपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान समाज और राष्ट्रभक्ति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'भारत माता की जय' कहने मात्र से राष्ट्रभक्ति सिद्ध नहीं होती, बल्कि यह तब सार्थक होती है जब हर व्यक्ति अपने जीवन के हर पल में समाज और देश के लिए कुछ करे।

समाज को बांटने वाली शक्तियों पर चिंता

अरुण कुमार ने कहा कि वर्तमान में समाज को विभाजित करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने जाति, धर्म और अन्य मुद्दों के आधार पर समाज को लड़ाने के प्रयासों की आलोचना की। उन्होंने कहा, "हमारे देश पर एक हजार साल तक विदेशी शक्तियों का शासन रहा, लेकिन अब पहली बार उन्हें लग रहा है कि उनका अस्तित्व खतरे में है। यही कारण है कि उन्होंने रणनीति बदलकर भारत, हिंदू और संघ को अपना शत्रु मान लिया है।"

सोशल मीडिया और मीडिया का उपयोग

उन्होंने कहा कि संघ और हिंदू समाज के खिलाफ सोशल मीडिया और मीडिया का उपयोग करके कई तरह के प्रयास हो रहे हैं। इसके जरिए संघ की छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है।

समाज के आत्मकेंद्रित रवैये पर चिंता

अरुण कुमार ने कहा, "आज हर व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि उसने देश और समाज के लिए क्या किया। दुर्भाग्य से समाज आत्मकेंद्रित और परिवार तक सीमित होता जा रहा है। ईर्ष्या, द्वेष और गुटबाजी ने समाज में अपनी जगह बना ली है।"

महापुरुषों के नाम पर संघर्ष

उन्होंने यह भी कहा कि समाज में महापुरुषों के नाम पर संघर्ष और आरक्षण के मुद्दे पर लड़ाई बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि नॉन-इश्यूज पर बड़े आंदोलन खड़े हो रहे हैं, जिससे समाज बंटने का खतरा बढ़ रहा है।

समाज को जोड़ने की अपील

अरुण कुमार ने सभी से अपील की कि वे समाज को बांटने वाली शक्तियों को पहचानें और उनके खिलाफ एकजुट होकर काम करें। उन्होंने कहा कि समाज में विश्वास और सहयोग की भावना को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी समाज और राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका पर चर्चा की। यह आयोजन हरमाड़ा नगर की हेडगेवार बस्ती में आयोजित किया गया।