मोहन भागवत का बयान: भाजपा से स्वतंत्र है RSS, पैरा-मिलिट्री फोर्स नहीं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि भाजपा या विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नजरिए से संघ को समझना गलत है। उन्होंने कहा कि सभी संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और RSS किसी राजनीतिक पार्टी को नियंत्रित नहीं करता।
भोपाल में RSS के 100 साल पूरे होने पर संबोधन
भागवत भोपाल में RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य सत्ता, टिकट या चुनाव नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्दी, मार्च और लाठी अभ्यास के बावजूद RSS को पैरा-मिलिट्री फोर्स मानना बड़ी भूल होगी।
हिंदू पहचान और सांस्कृतिक एकता पर जोर
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि मत, पंथ, संप्रदाय, भाषा और जाति भले अलग हों, लेकिन हिंदू पहचान सभी को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति एक है, धर्म एक है और हमारे पूर्वज भी समान हैं।
राजनीति से लेकर पर्यावरण तक कई मुद्दों पर चर्चा
गोष्ठी के दौरान मोहन भागवत ने राजनीति, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, युवाओं की दिशा, पारिवारिक जीवन और पर्यावरण जैसे विषयों पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने इन मुद्दों को समाज और राष्ट्र के समग्र विकास से जुड़ा बताया।
हाल के तीन प्रमुख बयान
13 दिसंबर: भारत के लिए जीने का समय
13 दिसंबर को अंडमान में दामोदर सावरकर के गीत ‘सागर प्राण तलमाला’ की 115वीं सालगिरह पर आयोजित समारोह में भागवत ने कहा कि देश को हर चीज से ऊपर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं, और हमारे देश में हमारे अपने देश की ही भक्ति होनी चाहिए। उन्होंने ‘तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े होंगे’ जैसे नारे को अस्वीकार्य बताया।
1 दिसंबर: भारत को विश्व में सही स्थान मिल रहा है
1 दिसंबर को पुणे में RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर हुए कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि आज विश्व मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात ध्यान से सुनी जाती है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का संकेत है। उनके अनुसार, भारत अब दुनिया में अपना उचित स्थान प्राप्त कर रहा है। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि संगठनों को केवल वर्षगांठ या शताब्दी का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि तय समय में अपने काम पूरे करने पर ध्यान देना चाहिए।
18 नवंबर: भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं
18 नवंबर को गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा कि भारत और हिंदू एक ही हैं, इसलिए भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी सभ्यता पहले से ही इसे प्रकट करती है। उनके अनुसार, जो भी भारत पर गर्व करता है, वह हिंदू है, और हिंदू केवल धार्मिक शब्द नहीं, बल्कि हजारों साल की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी एक सभ्यता गत पहचान है।
संघ के शुरुआती दिनों पर टिप्पणी
भागवत ने पहले दिए एक संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा था कि कभी लोग संघ के काम पर हंसते थे। उनके अनुसार, डॉ. हेडगेवार का भी मजाक उड़ाया जाता था और कहा जाता था कि वे साधारण काम भी नहीं कर सकते, फिर ऐसे बच्चों को लेकर राष्ट्र निर्माण कैसे करेंगे। उन्होंने बताया कि उस समय हिंदू संगठन के विचार को अव्यावहारिक माना जाता था और हिंदुओं को जागृत करने के प्रयासों का उपहास किया जाता था।
निष्कर्ष
अपने हालिया बयानों में मोहन भागवत ने एक तरफ RSS की स्वतंत्र भूमिका और चरित्र स्पष्ट किया, तो दूसरी ओर हिंदू पहचान, राष्ट्रभक्ति और भारत की वैश्विक स्थिति पर अपना दृष्टिकोण रखा। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि संघ का काम राजनीतिक नियंत्रण से अलग है और वह सांस्कृतिक, सामाजिक तथा नैतिक मूल्यों के आधार पर समाज को संगठित करने की दिशा में कार्य करता है।
Vivek Singh