शंकराचार्य विवाद में स्वामी सदानंद सरस्वती का अविमुक्तेश्वरानंद को खुला समर्थन
प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य पद और स्नान को लेकर चल रहा विवाद थमने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खुलकर बयान दिया है, वहीं अविमुक्तेश्वरानंद प्रशासन और शासन के रुख के खिलाफ धरने पर डटे हुए हैं।
तीन शंकराचार्यों का समर्थन और प्रशासन पर सवाल
स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि तीन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन को उनका प्रमाणपत्र मांगने का कोई अधिकार नहीं है। सदानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने निर्दोष ब्राह्मणों के साथ निर्दयता से मारपीट की, जो गलत है।
धरने पर अविमुक्तेश्वरानंद, तिरंगा फहराया
माघ मेले में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तिरंगा फहराया। उन्होंने कहा कि अगर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बस में होता तो वह कब के उन्हें स्नान करा चुके होते, लेकिन उन्हें डांटा जा रहा है और आने नहीं दिया जा रहा है। उनकी राय में एक समझदार नेता को दबा दिया गया है।
असली और नकली हिंदू की लड़ाई का दावा
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आज की लड़ाई हिंदू-मुसलमान या अंग्रेज-भारतीय के बीच नहीं है, बल्कि नकली हिंदू और असली हिंदू के बीच है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के बावजूद अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे और अत्याचार जितना बढ़ेगा, उनका विरोध उतना ही मजबूत होता जाएगा।
केशव प्रसाद मौर्य की अपील
रविवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रयागराज पहुंचे। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शंकराचार्य विवाद पर उन्होंने कहा कि जब उनसे बात करने को कहा जाएगा, वे जरूर बात करेंगे। उन्होंने कहा कि वे पूज्य शंकराचार्य से प्रार्थना कर सकते हैं और उनके चरणों में शीश झुकाकर निवेदन करते हैं कि वे संगम में स्नान कर विवाद समाप्त करें।
विवाद की शुरुआत: मौनी अमावस्या से तनाव
18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने के लिए कहा। विरोध होने पर उनके शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और मारपीट की बात सामने आई। पुलिस ने उनकी पालकी खींचकर दूर ले गई। इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
प्रशासन के नोटिस और चेतावनी
माघ मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में उनके द्वारा शंकराचार्य की पदवी लिखने पर सवाल किया गया, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन हुए हंगामे को लेकर जवाब मांगा गया। साथ ही यह चेतावनी दी गई कि उन्हें माघ मेले से बैन किया जा सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का जवाब दिया है।
शिविर पर नारेबाजी और बढ़ता तनाव
24 जनवरी की रात उनके शिविर पर कट्टर सनातनी सेना से जुड़े 8-10 युवक पहुंच गए। उन्होंने नारे लगाए, जिनमें ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ शामिल थे। आरोप है कि वे शिविर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिससे शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई। इस घटना के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जितना अधिक जुल्म होगा, वे उतनी ही मजबूती से कदम उठाएंगे।
विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा
माघ मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच करीब नौ दिनों से विवाद चल रहा है, जो कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। शंकराचार्य पद, संगम स्नान और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और इसका समाधान फिलहाल स्पष्ट नहीं दिख रहा।
L. N. Bhargava