स्पीकर बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव: राहुल को रोकने और पक्षपात का आरोप

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स्पीकर बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव: राहुल को रोकने और पक्षपात का आरोप

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर गरमाई बहस: विपक्ष ने लगाया पक्षपात का आरोप

लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। 50 से अधिक सांसदों के समर्थन के बाद पीठासीन अधिकारी ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी, जिस पर अब 10 घंटे तक बहस होगी। विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया है।

विपक्ष के मुख्य आरोप और बहस का घटनाक्रम

बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 20 बार रोका गया और उन्हें बार-बार रूलिंग बुक दिखाई गई। उन्होंने सत्ता पक्ष पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां विपक्ष के नेताओं को बोलने नहीं दिया जाता, वहीं सत्ता पक्ष के सदस्य भारत में बैन किताबें दिखाते हैं। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने दिसंबर 2023 में 100 विपक्षी सांसदों के निलंबन को संसदीय इतिहास का सबसे बड़ा निलंबन बताया, जो संसद में घुसपैठ पर सरकार से जवाब मांगने के कारण हुआ था। प्रियंका गांधी ने भी राहुल गांधी के सच बोलने और सत्ता पक्ष द्वारा उसे स्वीकार न कर पाने की बात कही।

डिप्टी स्पीकर के पद पर विवाद

बहस के दौरान डिप्टी स्पीकर के पद के खाली होने का मुद्दा भी गरमा गया। कांग्रेस सांसदों ने सवाल उठाया कि स्पीकर की अनुपस्थिति में डिप्टी स्पीकर नियुक्त न होने पर जगदंबिका पाल जैसे सदस्य कैसे कार्यवाही चला सकते हैं। सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब स्पीकर या उनकी मंजूरी से आया कोई सदस्य अध्यक्षता नहीं कर सकता। उन्होंने मांग की कि बहस से पहले सदन की सहमति से अध्यक्ष तय किया जाए। हालांकि, किरेन रिजिजू और निशिकांत दुबे ने नियमों का समर्थन करते हुए कहा कि चेयर पर बैठे किसी भी व्यक्ति को स्पीकर जैसी शक्तियां होती हैं। अमित शाह ने भी स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद कभी खाली नहीं होता, भले ही सदन भंग हो जाए।

सरकार का बचाव और प्रस्ताव का भविष्य

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं। उन्होंने स्पीकर ओम बिरला की प्रशंसा करते हुए लोकसभा की उच्च उत्पादकता और पक्ष-विपक्ष दोनों को पर्याप्त अवसर देने का जिक्र किया। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 94(c) लोकसभा को साधारण बहुमत से स्पीकर को हटाने का अधिकार देता है। इस प्रक्रिया में स्पीकर खुद सदन की अध्यक्षता नहीं करते लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने और मतदान करने का अधिकार होता है। वर्तमान में एनडीए गठबंधन के पास लोकसभा में 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, जिससे इस अविश्वास प्रस्ताव का पारित होना मुश्किल प्रतीत होता है। विपक्ष ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति के खिलाफ निजी हमला नहीं बल्कि संसद की मर्यादा बचाने के लिए लाया गया है।

Pushpendra Chaubey