सुप्रीम कोर्ट का फैसला: बार काउंसिल छात्रों पर कार्रवाई नहीं कर सकती

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: बार काउंसिल छात्रों पर कार्रवाई नहीं कर सकती

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकार क्षेत्र पर फैसला सुनाया

विवाद की पृष्ठभूमि

हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के 2026 बैच के लगभग 450 छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का निमंत्रण वापस लेने की मांग की थी। समारोह की तारीख तय नहीं हुई थी। छात्रों की नाराजगी जुलाई माह में मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी को लेकर थी जो दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के स्नातकों का वकील के तौर पर एनरोलमेंट अगले आदेश तक रोका जाए। साथ ही विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी और अभियान में शामिल प्रमुख छात्रों की पहचान करने को कहा। BCI ने कहा कि कानून के छात्रों से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है और कुछ शिक्षकों पर छात्रों को उकसाने का आरोप लगाया।

न्यायालय का निर्णय और बाद के घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 BCI या स्टेट बार काउंसिल को लॉ स्टूडेंट्स पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का कोई स्पष्ट या निहित अधिकार नहीं देता। पीठ ने BCI चेयरमैन के 13 अगस्त के आदेश को गैरकानूनी बताया। NALSAR के दो पूर्व छात्रों मिहिरा सूद और अभिषेक तिवारी ने याचिका दायर कर कहा था कि BCI को छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई का अधिकार नहीं है।

14 अगस्त को पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने BCI के हस्तक्षेप पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि भले ही छात्रों का फैसला गलत हो, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है। उन्होंने कहा था कि यह छात्रों और उनके बीच की बात है, BCI कौन होती है दखल देने वाली। विवाद बढ़ने के बाद BCI ने कुछ ही घंटों में अपना आदेश वापस ले लिया और कहा कि NALSAR के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं, जिससे सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने BCI के शुरुआती आदेश को मनमाना और गैरकानूनी बताते हुए आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के हाल के तीन बयानों पर भी विवाद हुआ। 15 मई को एक याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे हैं, जिन्हें रोजगार नहीं मिल रहा और वे मीडिया, सोशल मीडिया, RTI एक्टिविस्ट बनकर हर किसी पर हमला करते हैं। 22 जुलाई को एक जनहित याचिका की सुन

Navjeet Kaur