तेजस्वी और राघोपुर पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान

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तेजस्वी और राघोपुर  पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान

प्रशांत किशोर ने राघोपुर से चुनाव न लड़ने का किया ऐलान

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी चुनावों में खुद कहीं से भी उम्मीदवार के रूप में मैदान में नहीं उतरेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता सभी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने पर रहेगी। यह बयान तब आया जब चार दिन पहले उन्होंने राघोपुर से तेजस्वी यादव को चुनौती दी थी।

राघोपुर: लालू परिवार का गढ़

राघोपुर सीट को लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का गढ़ माना जाता है। तेजस्वी यादव यहां के मौजूदा विधायक हैं। 2020 के चुनाव में उन्होंने इस सीट से 48 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। यहां यादव, मुस्लिम और दलितों का मजबूत समीकरण है, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित करता है।

प्रतीकात्मक महत्व की सीट

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, राघोपुर सीट का प्रतीकात्मक महत्व है। यह सीट बिहार की सत्ता की राजनीति का केंद्र मानी जाती है। पिछले 8 चुनावों में से 7 बार यहां राजद ने जीत दर्ज की है। प्रशांत किशोर ने यहां से चुनाव प्रचार की शुरुआत कर यह संदेश देने की कोशिश की कि सत्ता के गढ़ में भी बदलाव की लड़ाई लड़ी जाएगी।

NDA और महागठबंधन पर निशाना

प्रशांत किशोर ने NDA और महागठबंधन दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये गठबंधन लूट के लिए आपस में लड़ रहे हैं। उन्होंने बिहार की राजनीति में नई दिशा देने की बात कही है।

हालांकि, प्रशांत किशोर का चुनाव न लड़ने का फैसला इस बात पर जोर देता है कि वह अपनी भूमिका को एक रणनीतिकार के रूप में ही सीमित रखना चाहते हैं।