थलपति विजय की TVK को अप्रत्याशित जीत, फैन क्लब ने बदली तमिलनाडु की सियासत

· 1 min read

तमिलनाडु में थलपति विजय की TVK को बड़ी जीत, फैन क्लब के दम पर बदली सियासत

तमिलनाडु की राजनीति में 4 मई को एक ऐसा अध्याय लिखा गया, जिसने 50 साल पुरानी 2 पॉलिटिकल पार्टियों की ईंट से ईंट बजा दी। थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने 2026 के विधानसभा चुनाव में वो कर दिखाया, जिसे नामुमकिन माना जा रहा था। इस ऐतिहासिक जीत का सबसे बड़ा सच ये है कि विजय को जीत किसी ‘पॉलिटिकल मास्टरमाइंड’ ने नहीं, बल्कि उनके उन प्रशंसकों ने दिलाई है, जो अब तक केवल सिनेमा के पर्दे पर उनके लिए सीटियां बजाते थे।

सबसे बड़ा उलटफेर: जब ‘स्टालिन’ अपने ही गढ़ हार गए

इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा कोलाथुर सीट से आया। 2011 से लगातार जीतते आ रहे मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को टीवीके के वी.एस. बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से हरा दिया। स्टालिन को 74,202 वोट मिले, जबकि वी.एस. बाबू ने 82,997 से वोट पाकर जीत दर्ज की। खुद विजय ने भी अपनी दोनों सीटों- पेराम्बुर और तिरुचि ईस्ट पर भारी मतों से जीत दर्ज की है।

कहानी 2009 की: जब ‘फैन क्लब’ को मिला नया नाम

विजय की राजनीतिक तैयारी रातों-रात नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे 17 साल की लंबी मेहेनत है। इसकी शुरुआत जुलाई 2009 में हुई, जब विजय ने अपने करीब 85,000 फैन क्लबों को एक छत के नीचे लाकर ‘विजय मक्कल इयक्कम’ (VMI) नाम का कल्याणकारी संगठन बनाया। उनके पिता और मशहूर निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर ने विजय के इस आधार को राजनीतिक रंग देने में शुरुआती अहम भूमिका निभाई।

2011 का वो समर्थन: जब विजय को प्रशंसकों की ताकत का एहसास हुआ

राजनीति में विजय का पहला सक्रिय कदम 2011 के विधानसभा चुनावों में दिखा था। उस वक्त विजय ने सीधे चुनाव नहीं लड़ा था, बल्कि उनके संगठन (VMI) ने जयललिता के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक (AIADMK) गठबंधन को खुला समर्थन दिया था। उनके पिता चंद्रशेखर ने खुद जयललिता से मुलाकात की थी और भ्रष्टाचार के खिलाफ परिवर्तन के लिए प्रशंसकों को AIADMK के लिए काम करने का निर्देश दिया था। उस जीत ने विजय को एहसास कराया कि उनके प्रशंसकों की ताकत सत्ता बदल सकती है।

2021 का ‘टेस्ट रन’: स्थानीय निकाय चुनाव में चौंकाने वाली जीत

2026 की बड़ी जीत का असली ट्रेलर 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में दिखा था। विजय के प्रशंसकों ने बिना किसी आधिकारिक पार्टी के निर्दलीय चुनाव लड़ा और 169 में से 115 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर सबको हैरान कर दिया। ये पहला संकेत था कि विजय का फैन क्लब अब एक अनुशासित राजनीतिक मशीनरी में बदल चुका है।

बूथ लेवल का ‘क्रेजी मैनेजमेंट’: 69,000 बूथों पर ‘मिनी आर्मी’

जहां पारंपरिक पार्टियों को कार्यकर्ताओं को मैनेज करने में पसीने छूटते हैं, वहीं टीवीके ने राज्य के सभी 69,000 बूथों पर 8-8 सदस्यों की कमेटियां तैयार की थीं।

‘इरावु नेरा पादसालाई’: शिक्षा के जरिए घर-घर में पैठ

विजय ने अपनी छवि ग्लैमरस स्टार के बजाय ‘सबकी मदद के लिए आगे रहने वाले नेता के तौर पर बनाई। उन्होंने राज्य के सभी 234 क्षेत्रों में ‘इरावु नेरा पादसालाई’ (रात्रि अध्ययन केंद्र) शुरू किए । ये पहल उन छात्रों के लिए थी जो बोर्ड परीक्षाओं में पिछड़ रहे थे। इसके साथ ही विझियागम (नेत्र दान), कुरुथियागम (रक्तदान) और विरुन्थागम (मुफ्त भोजन) जैसे कार्यक्रमों ने उन्हें जमीन पर एक मजबूत सामाजिक आधार दिया ।

‘व्हिसल’ का जादू: 60% बढ़ गई सीटी की बिक्री

जब जनवरी 2026 में चुनाव आयोग ने टीवीके को ‘व्हिसल’ (सीटी) प्रतीक चिन्ह दिया, तो इसे सेलिब्रेशन का प्रतीक माना गया। इकोनॉमिक इम्पैक्ट: तमिलनाडु में चुनावी मौसम के दौरान सीटियों की बिक्री में 60% का उछाल देखा गया। व्हिसल कोलम अभियान: विजय ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने घरों के बाहर ‘व्हिसल’ के आकार की रंगोली (कोलम) बनाएं। इस एक कदम ने उन्हें राज्य की ‘साइलेंट वोटर’ यानी महिलाओं से सीधे जोड़ दिया।

‘बिरयानी संस्कृति’ बनाम ‘सेल्फ-फंडिंग’

तमिलनाडु की राजनीति में रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए ‘बिरयानी और नकद’ का बोलबाला रहा है, लेकिन विजय के प्रशंसक क्लबों ने इस मॉडल को चुनौती दी। उनके फैन क्लब ने रैलियों के लिए खुद पैसे जमा किए और स्वेच्छा से बूथ एजेंट बने। विजय ने अपनी रैलियों में साफ कहा, “मैंने फिल्मों से पर्याप्त कमा लिया है, मुझे जनता के पैसे की जरूरत नहीं है, मैं भ्रष्टाचार नहीं करूंगा।”

विजन 2026: AI मंत्रालय और युवाओं के लिए रोजगार

विजय का घोषणापत्र केवल लोकलुभावन वादों का पिटारा नहीं था, बल्कि उसमें आधुनिक तमिलनाडु का रोडमैप था।

द्रविड़ राजनीति के नए ‘सूर्य’ का उदय

तमिलनाडु की जनता ने 55 सालों से चल रहे DMK और AIADMK के चक्र को तोड़ दिया है। विजय की जीत यह साबित करती है कि अगर एक सेलिब्रिटी अपनी लोकप्रियता को वर्षों की सामाजिक सेवा और जमीनी संगठन (फैन क्लब) से जोड़ दे, तो वो किसी भी राजनीतिक दिग्गज को धूल चटा सकता है।

Amit Pateria