उज्जैन में गधों का मेला बिहार चुनाव और फिल्मों के नाम बने आकर्षण

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उज्जैन में गधों का मेला  बिहार चुनाव और फिल्मों के नाम बने आकर्षण

उज्जैन में पारंपरिक गधों का मेला: बिहार चुनाव और फिल्मों के नाम बने आकर्षण

उज्जैन में हर साल आयोजित होने वाला पारंपरिक गधों का मेला इस बार भी उत्साह और परंपराओं के साथ शुरू हुआ। मेले की शुरुआत गधों को गुलाब जामुन खिलाकर और पूजा-अर्चना करके की गई। इस साल मेले में देशभर से 500 गधे और लगभग 200 घोड़े बिक्री के लिए लाए गए हैं।

गधों के दिलचस्प नाम

इस बार मेले में आए गधों के नाम "तेजस्वी", "ओवैसी", "पुष्पा", "सलमान", "शाहरुख", "ऐश्वर्या" और "जैकलीन" जैसे ट्रेंडिंग नामों पर रखे गए हैं। मेला प्रभारी कैलाश प्रजापत ने बताया कि हर साल मौजूदा ट्रेंड और चर्चित नामों के आधार पर गधों के नाम रखे जाते हैं ताकि ग्राहक आकर्षित हो सकें।

कीमत और बिक्री

मेले में गधों की कीमत 4 हजार से 15 हजार रुपए तक बताई जा रही है, जबकि छोटे घोड़े 10 हजार से 20 हजार रुपए में बिक रहे हैं। व्यापारी बबलू प्रजापति ने बताया कि गधे मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र से लाए गए हैं, जबकि घोड़े अमरावती और मालेगांव जैसे स्थानों से आए हैं।

गधों की ताकत का आकलन

पशुपालक गधों की ताकत और उम्र का आकलन उनके दांत देखकर करते हैं। इसी आधार पर उनकी कीमत तय की जाती है। मेले में बड़ी संख्या में पशुपालक और खरीदार पहुंचे हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान

यह मेला न केवल एक परंपरा है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा भी है। गधे आज भी निर्माण कार्यों, ईंट-भट्टों और सामान ढोने जैसे कामों में सबसे सस्ता और भरोसेमंद साधन माने जाते हैं।

Sharad Shrivastava