वृंदावन में संघ प्रमुख भागवत बोले, एकजुट हिंदू से विरोधी हो रहे टुकड़े

· 1 min read
वृंदावन में संघ प्रमुख भागवत बोले, एकजुट हिंदू से विरोधी हो रहे टुकड़े

वृंदावन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने वृंदावन स्थित सुदामा कुटी आश्रम के शताब्दी महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया और धार्मिक एकता तथा सनातन धर्म के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए।

हिंदुओं की एकता और विरोधियों की कमजोरी पर टिप्पणी

मोहन भागवत ने कहा कि जैसे-जैसे सनातन धर्म के अनुयायी और हिंदू समाज एकजुट होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे उनके विरोधी कमजोर होते जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले 50 वर्षों में जैसे-जैसे हिंदू समाज में एकता बढ़ी है, विरोधी पक्षों में विभाजन और कमजोरी दिखाई दी है। उन्होंने यह भी कहा कि ये शक्तियां अंदर से खोखली हो चुकी हैं और दुनिया भर में हार रही हैं।

भागवत ने कहा कि ये लोग हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकते, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हिंदू समाज जिस प्रकार तैयार होना चाहिए, वैसा अभी नहीं हुआ है। उनके अनुसार, इसी कमी के कारण विरोधी हमारे सामने सक्रिय दिखाई देते हैं।

इतिहास, भक्ति और धर्म की रक्षा पर विचार

अपने संबोधन में भागवत ने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे ऊपर लगभग 500 वर्ष तक मुगलों ने शासन किया, लेकिन इसके बावजूद हिंदू समाज नष्ट नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर हमारा बुरा समय आना होता, तो उसी काल में आ जाता, परंतु हम उस दौर से भी निकलकर आगे बढ़े और आज फिर से हिंदुओं का देश आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि अत्याचारों के बावजूद हिंदुओं ने अपने धर्म की रक्षा की और यह शक्ति उन्हें भक्ति से मिली। भागवत ने स्पष्ट किया कि यह धार्मिक शक्ति और आस्था ही थी, जिसने कठिन समय में भी समाज को संभाले रखा। हालांकि, उन्होंने अपने भाषण में यह स्पष्ट नहीं किया कि “जिनके टुकड़े होते चले जाएंगे” से उनका संकेत किनके प्रति था।

सुदामा कुटी आश्रम शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान सुदामा दास जी महाराज के जीवन परिचय और नाभा पीठ का परिचय कराने वाली एक पुस्तक का विमोचन मोहन भागवत की मौजूदगी में किया गया। यह विमोचन समारोह शताब्दी महोत्सव के प्रमुख आयोजनों में शामिल था।

शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सुदामा कुटी आश्रम में विशेष आयोजन किए गए। शनिवार सुबह आश्रम से एक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज रथ पर सवार होकर भ्रमण के लिए निकले। यह शोभायात्रा शहर के विभिन्न चौराहों से गुजरी और दोपहर तीन बजे के आसपास वापस सुदामा कुटी आश्रम पहुंची।

महोत्सव का समापन और महत्व

सुदामा कुटी आश्रम के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह शताब्दी महोत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक प्रवचन, शोभायात्रा और पुस्तक विमोचन जैसे आयोजनों के माध्यम से आश्रम की परंपरा, सुदामा दास जी महाराज के योगदान और नाभा पीठ की भूमिका को रेखांकित किया गया।

आयोजन से जुड़े पलों की जानकारी और कार्यक्रम की विस्तृत गतिविधियों के लिए एक ब्लॉग के माध्यम से लगातार अपडेट भी उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस महोत्सव से जुड़े रह सकें।

Bhavanesh Soni