पूर्वांचल में भाजपा के 5 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पर फंसा पेंच, दिग्गजों में खींचतान
पूर्वांचल की राजनीति में जाति और दबाव की अहम भूमिका रही है, और इस बार भाजपा इसी चक्रव्यूह में उलझी हुई दिख रही है। पार्टी के दिग्गजों ने पूर्वांचल के पांच जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है, जिससे मामला अटक गया है। इस खींचतान का असर पार्टी के कामकाज पर भी पड़ रहा है, जबकि विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम का वक्त बचा है।
चंदौली: राजनाथ और महेंद्रनाथ आमने-सामने
चंदौली, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का गृह जनपद है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, डॉ. पांडेय मौजूदा जिलाध्यक्ष काशी सिंह को हटाकर किसी ब्राह्मण चेहरे को अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। उनके खेमे का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में काशी सिंह के नेतृत्व में ठाकुरों ने सपा को वोट दिया, जिससे डॉ. पांडेय चुनाव हार गए। वहीं, काशी सिंह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खेमे के माने जाते हैं, जिसके कारण दोनों नेताओं के बीच जिलाध्यक्ष की घोषणा पर गतिरोध बना हुआ है। डॉ. पांडेय को प्रदेश संगठन चुनाव का प्रभारी बनाया गया था, और उनकी देखरेख में 93 जिलाध्यक्ष घोषित हो चुके हैं, लेकिन उनके गृह जनपद में ही नियुक्ति अटकी है।
देवरिया: दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों का अहम टकराव
देवरिया में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी के करीबी पिंटू जायसवाल का जिलाध्यक्ष बनना लगभग तय था। त्रिपाठी ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से भी उनके नाम पर सहमति ले ली थी। हालांकि, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद शशांकमणि त्रिपाठी और दो स्थानीय विधायकों ने पिंटू जायसवाल का विरोध किया। उनके विरोध का तर्क था कि पिंटू 2021 में पंचायत चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे और उन्हें ब्लॉक प्रमुख बनाया गया था; अब जिलाध्यक्ष बनाने से कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाएगा। इस विरोध के बाद पिंटू जायसवाल जिलाध्यक्ष बनते-बनते रह गए, और अब पार्टी ऐसे नाम की तलाश में है जिस पर सभी सहमत हों।
अंबेडकरनगर: कुर्मी-ब्राह्मण चेहरे की तलाश
भाजपा अंबेडकरनगर में जिला उपाध्यक्ष राणा रणधीर सिंह को अध्यक्ष बनाना चाहती थी, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस पर आपत्ति जताई। चौधरी का तर्क है कि फैजाबाद मंडल कुर्मी और ब्राह्मण बहुल इलाका है, और सपा के पास इस क्षेत्र में मजबूत कुर्मी और ब्राह्मण नेता हैं। पार्टी ने फैजाबाद मंडल के बाराबंकी में ही कुर्मी जिलाध्यक्ष बनाया है, और एक भी ब्राह्मण को जिलाध्यक्ष नहीं बनाया। चौधरी ने राणा की जगह किसी कुर्मी या ब्राह्मण चेहरे को जिलाध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया, ताकि वोटबैंक साधा जा सके, जिससे अंबेडकरनगर में भी जिलाध्यक्ष की घोषणा नहीं हो पाई है।
वाराणसी: पीएम मोदी की पसंद का इंतजार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हंसराज विश्वकर्मा वर्तमान जिलाध्यक्ष हैं, और पार्टी ने उन्हें विधान परिषद सदस्य (MLC) भी बनाया है। 34 साल से राजनीति में सक्रिय हंसराज पिछड़ों का एक अहम चेहरा हैं। सूत्रों के अनुसार, वाराणसी में जिलाध्यक्ष का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हरी झंडी के बाद ही होगा, क्योंकि हंसराज भी तीन बार से प्रधानमंत्री की मर्जी से ही इस पद पर बने हुए हैं।
गोरखपुर: सीएम योगी की पसंद है निर्णायक
गोरखपुर में मार्च, 2025 में देवेश श्रीवास्तव को महानगर अध्यक्ष घोषित किया गया था, लेकिन जून, 2025 में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया, जिससे यह पद खाली हो गया। यहां कोई बड़ी सियासी उठापटक नहीं है, और महानगर अध्यक्ष का चयन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंद से ही होगा। पार्टी उनके इशारे का इंतजार कर रही है।
अब तक 93 नामों पर लगी मुहर
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को 98 संगठनात्मक जिलों में बांटा है। पार्टी ने 16 मार्च, 2025 को 70 जिलाध्यक्षों की पहली सूची जारी की थी। इसमें शामिल गोरखपुर के जिलाध्यक्ष देवेश श्रीवास्तव का जून, 2025 में निधन हो गया था। वहीं, गोंडा जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप को एक महिला कार्यकर्ता के साथ वीडियो वायरल होने पर हटा दिया गया था। इस प्रकार 68 जिलाध्यक्ष रह गए थे। इसके बाद, 26 नवंबर को 14 और इस साल 26 फरवरी को 11 और जिलाध्यक्षों के नाम सामने आए। गोंडा में इकबाल बहादुर तिवारी को अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, चंदौली, देवरिया, वाराणसी, अंबेडकरनगर और गोरखपुर में जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां अभी तक नहीं हो पाई हैं।
Gulzar Ahmad