अजीत डोभाल बोले: आजादी मनमानी नहीं, संघर्ष की देन; नई पीढ़ी समझे सही मतलब

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अजीत डोभाल बोले: आजादी मनमानी नहीं, संघर्ष की देन; नई पीढ़ी समझे सही मतलब

अजीत डोभाल: आजादी मनमानी नहीं, संघर्ष की देन

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को पुणे में लोकमान्य तिलक पुरस्कार समारोह में कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि आजादी का मतलब केवल अपनी मर्जी से कुछ भी करने की मनमानी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के पीछे लंबा संघर्ष और इतिहास है।

सम्मान

कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने डोभाल को लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित किया।

डोभाल का संदेश

डोभाल ने कहा कि युवा आजादी को केवल अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी करने की स्वतंत्रता समझ सकते हैं, लेकिन आजादी का वास्तविक अर्थ यह नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सोचना चाहिए कि वे केवल राष्ट्रहित में काम करेंगे। उन्हें निजी हितों का त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। अगर ऐसे विचार मन में आएं भी, तो उन्हें नजरअंदाज कर देना चाहिए। देश अपने मिशन में सफल होगा और इतिहास का नया अध्याय लिखेगा।

विवाद का संदर्भ

डोभाल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वायरल हुए कुछ जेन-जी वीडियो और बयानों को लेकर विवाद जारी है। इनमें कुछ छात्राओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां भी शामिल हैं। इस घटनाक्रम के बाद अभिव्यक्ति की आजादी और उसकी सीमाओं को लेकर बहस छिड़ी है।

शाह का बयान

अमित शाह ने बताया कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी द्वारा लिए गए पहले फैसलों में से एक अजीत डोभाल को NSA नियुक्त करना था। शाह ने कहा कि इस कदम ने भारत के रणनीतिक रुख को बदल दिया। आज भारत की विदेश नीति में फौलाद जैसी मजबूती है और हमने आत्मसम्मान के साथ दुनिया में अपनी स्थिति मजबूत की है।

भागवत का बयान

25 जुलाई को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली में कहा था कि आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्हें हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए, न कि आदेश देना चाहिए। संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है। हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता।

जेन-जी

जेन-जी यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी डिजिटल युग में बड़ी हुई है। यह सोशल मीडिया, तेज सूचना और नेटवर्किंग का इस्तेमाल बेहतर करती है। यह पीढ़ी पारंपरिक तरीकों के बजाय क्रिएटिव और विजुअल तरीकों से अपनी बात रखने के लिए जानी जाती है।

Adarsh Chaurasiya