भोपाल में ई-वेस्ट निस्तारण पर एनजीटी सुनवाई
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के कथित अवैज्ञानिक निस्तारण और अनौपचारिक प्रसंस्करण से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को संभावित नुकसान से संबंधित शिकायत पर सुनवाई की।
शिकायत में क्या कहा गया
शिकायत में आरोप लगाया गया कि भोपाल में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ई-वेस्ट उत्पन्न होता है, जिसमें से सीमित मात्रा का ही वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण और निस्तारण किया जा रहा है। शेष ई-वेस्ट का अनधिकृत कबाड़ कारोबारियों और अनौपचारिक रीसाइक्लिंग इकाइयों से निस्तारण हो रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक कचरे को खुले में जलाने या अवैज्ञानिक तरीके से तोड़ने से सीसा, पारा, कैडमियम और क्रोमियम जैसी हानिकारक धातुओं और पदार्थों का उत्सर्जन हो सकता है। इससे वायु, मिट्टी और भू-जल प्रभावित होने तथा जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
आवेदक द्वारा उठाए गए मुद्दे
आवेदक ने वायु गुणवत्ता में गिरावट, मिट्टी और भूजल प्रदूषण, संभावित स्वास्थ्य प्रभावों, अनधिकृत ई-वेस्ट प्रसंस्करण इकाइयों और भोपाल में स्थापित ई-वेस्ट क्लिनिक के प्रभावी रूप से संचालित नहीं होने सहित कई मुद्दे उठाए।
उन्होंने उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित करने, अनधिकृत इकाइयों की पहचान कर कार्रवाई करने, ई-वेस्ट क्लिनिक को पुनः प्रभावी रूप से संचालित करने, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन और वसूली करने, संग्रहण केंद्र और अधिकृत री-साइक्लरों की व्यवस्था करने तथा जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग की।
सुनवाई और अगली तारीख
सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और न्यायिक सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने की। आवेदक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े, लेकिन तकनीकी ऑडियो समस्या के कारण पीठ उनसे संवाद नहीं कर सकी।
एनजीटी की नई दिल्ली बैंच ने माना कि मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ भोपाल में आता है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को भोपाल पीठ में होगी।
Amit Pateria