भोपाल मेट्रो: सुभाष नगर से एम्स तक प्रायोरिटी कॉरिडोर पर संचालन की शुरुआत
20 दिसंबर को उद्घाटन, 21 दिसंबर से आम यात्रियों के लिए सेवा
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल 20 दिसंबर से मेट्रो सिटी बन जाएगी। इसी दिन सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर का उद्घाटन किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मिंटो हॉल में आयोजित कार्यक्रम के बाद सुभाष नगर स्टेशन से मेट्रो में बैठकर एम्स तक यात्रा करेंगे, जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिकॉर्डेड वीडियो संदेश भी जारी किया जाएगा। आम यात्रियों के लिए मेट्रो की सेवा 21 दिसंबर की सुबह 9 बजे से शुरू होगी।
रूट, स्टेशन और समयसारिणी
भोपाल मेट्रो के दो मुख्य प्रोजेक्ट हैं: ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन। ऑरेंज लाइन करोंद से एम्स के बीच 16.74 किलोमीटर लंबी है, जबकि ब्लू लाइन भदभदा से रत्नागिरि तक 14.16 किलोमीटर है। दोनों लाइनों के लिए डिपो सुभाष नगर में बनाया गया है और पुल बोगदा में जंक्शन होगा, जहां ट्रेनें क्रॉस करेंगी।
सबसे पहले ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सुभाष नगर से एम्स तक 6.22 किलोमीटर के हिस्से पर मेट्रो चलाई जाएगी। इस कॉरिडोर पर कुल 8 स्टेशन हैं: सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स।
एक दिन में कुल 17 ट्रिप संचालित होंगी। इनमें एम्स से सुभाष नगर के बीच 9 और सुभाष नगर से एम्स के बीच 8 ट्रिप शामिल हैं। पहली ट्रेन सुबह 9 बजे एम्स से चलेगी और लगभग 40 मिनट में सुभाष नगर पहुंचेगी। आखिरी ट्रेन भी एम्स से ही शाम 5 बजे रवाना होगी और लगभग 6:25 बजे सुभाष नगर पहुंचेगी।
किराया संरचना और अन्य शहरों से तुलना
भोपाल मेट्रो के किराए को तीन जोन में बांटा गया है। कुल 8 स्टेशनों के बीच पहले दो स्टेशन की यात्रा का न्यूनतम किराया 20 रुपए रखा गया है। तीन से पांच स्टेशन की दूरी के लिए 30 रुपए और छह से आठ स्टेशन की यात्रा के लिए 40 रुपए किराया देना होगा। उदाहरण के रूप में, डीबी मॉल स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन तक जाने पर 20 रुपए और डीबी मॉल से एम्स तक जाने पर 40 रुपए किराया देना पड़ेगा।
मेट्रो प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि भोपाल में किराए में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। इंदौर मेट्रो में शुरुआती सात दिन मुफ्त यात्रा और एक महीने तक 25 से 75 प्रतिशत तक की छूट दी गई थी, लेकिन भोपाल में ऐसा मॉडल लागू नहीं किया जाएगा। इस कारण यहां न्यूनतम किराया 20 रुपए से शुरू हो रहा है, जबकि दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, जयपुर जैसे अन्य मेट्रो शहरों में न्यूनतम किराया 10, 11 या 15 रुपए से शुरू होता है।
यात्रा प्रक्रिया और समय
यात्री स्टेशन पर टिकट लेने के बाद प्लेटफॉर्म पर पहुंचेंगे। मेट्रो ट्रेन के आगमन के लगभग 10 सेकंड बाद प्लेटफॉर्म और ट्रेन के गेट एक साथ खुलेंगे। इस दौरान अनाउंसमेंट के जरिए गेट से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाएगी।
सुभाष नगर से एम्स के बीच 6.22 किलोमीटर के इस प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक सामान्य रूप से 2 से 3 मिनट में पहुंचेगी। एम्स से चढ़ने पर पहला स्टेशन अलकापुरी होगा, जहां तक पहुंचने में करीब 3 मिनट लगेंगे। प्रत्येक स्टेशन पर यात्रियों के चढ़ने और उतरने के लिए मेट्रो लगभग 2 मिनट रुकेगी। इस प्रकार पूरी यात्रा का कुल समय लगभग 40 मिनट रहेगा।
कोच की क्षमता और अंदरूनी व्यवस्था
एक ट्रेन में कुल तीन कोच होंगे और तीनों को जोड़ने पर ट्रेन की लंबाई लगभग 67 मीटर होगी। पहले और तीसरे कोच का आगे का हिस्सा इंजन की तरह भी काम करेगा और वही ड्राइविंग पार्ट होगा, जबकि बीच वाला कोच ट्रेलर कार है।
एक ट्रेन की कुल क्षमता लगभग 980 यात्रियों की है। एक कोच में लगभग 330 यात्री सफर कर सकते हैं। एक कोच में आमने-सामने दोनों तरफ मिलाकर केवल छह लंबी सीटें हैं, जिन पर कुल लगभग 50 यात्री बैठ सकते हैं, जबकि शेष यात्री खड़े होकर यात्रा करेंगे। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, कोच की क्षमता अधिक है, लेकिन लगभग 250 यात्री बेहतर तरीके से यात्रा कर सकते हैं।
कोच में आमने-सामने लंबी सीटें हैं, जिन पर 45 से अधिक यात्री बैठ सकते हैं। दरवाजे ऑटोमैटिक हैं और बीच के हिस्से तथा दरवाजों तक पर्याप्त जगह है, जहां 300 से अधिक यात्री खड़े हो सकते हैं। कोच में मोबाइल चार्जिंग के लिए पर्याप्त पॉइंट उपलब्ध कराए गए हैं।
दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाएं
मेट्रो ट्रेन के पहले और आखिरी कोच में दिव्यांगजन की व्हीलचेयर के लिए अलग से स्थान रखा गया है। व्हीलचेयर की जगह के पास 'लॉन्ग स्टॉप रिक्वेस्ट बटन' लगाया गया है, जिसे दबाकर दिव्यांग यात्री ट्रेन ऑपरेटर को दरवाजा अधिक देर तक खुला रखने के लिए सूचित कर सकते हैं, ताकि वे आराम से ट्रेन में चढ़ या उतर सकें।
सभी स्टेशनों पर लिफ्ट और एस्केलेटर लगाए गए हैं। दिव्यांगजन के लिए ब्रेल लिपि में संकेत और स्पर्शनीय टाइलें लगाई गई हैं, ताकि वे आसानी से रास्ता पहचान सकें। दृष्टिहीन यात्रियों के लिए ऑडियो अनाउंसमेंट सिस्टम भी उपलब्ध है।
इमरजेंसी और सुरक्षा प्रबंधन
भोपाल मेट्रो में सामान्य ट्रेनों की तरह ट्रेन के अंदर स्टाफ मौजूद नहीं रहेगा और यात्री ट्रेन संचालक के पास सीधे नहीं जा सकेंगे। आपात स्थिति में यात्रियों के लिए कोच में इमरजेंसी बटन और इंटरकॉम की व्यवस्था की गई है। इमरजेंसी बटन दबाने पर यात्री ड्राइवर से इंटरकॉम के जरिए बात कर सकेंगे। इसके बाद ड्राइवर तुरंत संबंधित स्टेशन पर इमरजेंसी की सूचना देगा, जिससे ट्रेन के पहुंचने से पहले ही इमरजेंसी टीम स्टेशन पर पहुंच सकेगी।
सभी स्टेशन और डिपो पर सीसीटीवी कैमरे और अग्निशमन उपकरण लगाए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर पर निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।
कोच की तकनीकी विशेषताएं और संचालन
भोपाल मेट्रो के सभी कोच सफेद और नारंगी रंग के लुक के साथ स्टेनलेस स्टील से बने हैं, जो रस्ट फ्री हैं। एक ट्रेन में तीन कोच होंगे और इस तरह की कुल 27 ट्रेनें चलाई जानी हैं। इसके लिए कुल 81 कोच आएंगे, जिनमें से 8 ट्रेनें अभी तक पहुंच चुकी हैं।
कोच के दरवाजे, ब्रेक और एसी के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर सिस्टम लगाए गए हैं, जिनके जरिए संचालन होगा। हर कोच में अलग-अलग स्थानों पर डिजिटल मैप दिए गए हैं, जो पूरे रास्ते रूट और स्टेशनों की जानकारी दिखाएंगे। एलईडी टीवी भी लगाए गए हैं, जिन पर यात्री समाचार और मनोरंजन कार्यक्रम देख सकेंगे।
शुरुआत में मेट्रो की अधिकतम स्पीड लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी। ट्रायल रन के दौरान भोपाल मेट्रो को 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक की स्पीड पर भी परखा जा चुका है। फिलहाल मेट्रो ड्राइवर के जरिए चलाई जाएगी, लेकिन भविष्य में ड्राइवर-लेस संचालन की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
यात्रा के दौरान सूचना व्यवस्था
यात्रा के दौरान यात्रियों को दो तरह के डिस्प्ले के माध्यम से स्टेशनों की जानकारी दी जाएगी। ट्रेन शुरू होने पर सबसे पहले पूरे रूट का मैप दिखेगा। इसके बाद जैसे-जैसे अगला स्टेशन आएगा, डिस्प्ले पर उस स्टेशन की जानकारी और एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच लगा समय भी प्रदर्शित होगा।
गंतव्य स्टेशन के नजदीक पहुंचने पर अनाउंसमेंट के जरिए यात्रियों को सूचित किया जाएगा कि स्टेशन आ रहा है और गेट से दूर रहने की सलाह दी जाएगी। स्टेशन पर पहुंचने के बाद मेट्रो के गेट प्लेटफॉर्म की तरफ खुलेंगे और यात्री बाहर निकल सकेंगे।
परियोजना का इतिहास और निर्माण प्रगति
भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर वर्ष 2018 में काम शुरू किया गया था। सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक का काम पूरा हो चुका है। इसके आगे अलकापुरी, एम्स और डीआरएम मेट्रो स्टेशनों के कुछ कार्य जारी हैं, जिन्हें पूरा किया जा रहा है। रेलवे ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं।
भोपाल में मेट्रो का पहला ट्रायल रन 3 अक्टूबर 2023 को किया गया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था।
इंदौर और अन्य शहरों के संदर्भ में महत्व
देश में दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, गुरुग्राम, नोएडा, नागपुर, पुणे और अहमदाबाद में पहले से मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं। मध्य प्रदेश में पहली मेट्रो सेवा इंदौर में 31 मई 2024 से शुरू हुई थी। नेटवर्क के लिहाज से दिल्ली मेट्रो देश की सबसे बड़ी मेट्रो प्रणाली मानी जाती है।
अब भोपाल में भी 21 दिसंबर से आम लोग मेट्रो में सफर कर सकेंगे। हालांकि, यहां न्यूनतम किराया अन्य कई मेट्रो शहरों की तुलना में अधिक है। इसके बावजूद आधुनिक, वातानुकूलित, प्रदूषण रहित कोच, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था इसे राजधानी के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन विकल्प बनाती हैं।
Lokendra Mishra