भोपाल से उड़ा गिद्ध पहुंचा पाकिस्तान, GPS सिग्नल से हुआ खुलासा

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भोपाल से उड़ा गिद्ध पहुंचा पाकिस्तान, GPS सिग्नल से हुआ खुलासा

भोपाल से उड़ा गिद्ध पहुंचा पाकिस्तान, GPS सिग्नल से हुआ खुलासा

मध्य प्रदेश के भोपाल से उड़ा एक गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गया है। राजस्थान के रास्ते पाक के खानेवाल जिले में गिद्ध मिला। वन विहार नेशनल पार्क को इसकी तब जानकारी लगी, जब गिद्ध में लगे GPS का सिग्नल नहीं मिला।

गिद्ध को भोपाल के पास हलाली डैम से 30 मार्च को छोड़ा गया था। यह गिद्धों को उनके बसेरों में छोड़ने के लिए एक वैज्ञानिक रूप से चयनित स्थल है। रिलीज के बाद यह गिद्ध राजस्थान होते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर 6 अप्रैल तक पाकिस्तान पहुंच गया। 7 अप्रैल को जब इसके मूवमेंट का सिग्नल प्राप्त नहीं हुआ, तब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया को तत्काल सूचित किया गया।

इसके बाद WWF-India ने अपने समकक्ष संगठन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान से संपर्क स्थापित किया। पाकिस्तान वन विभाग एवं WWF-पाकिस्तान ने खानेवाल जिले में इस गिद्ध को सफलतापूर्वक स्थानीय निवासियों से बरामद किया गया।

तेज आंधी-ओलावृष्टि की वजह से प्रभावित हुआ गिद्ध

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ पाकिस्तान के अनुसार, 7 अप्रैल को खानेवाल एवं मुल्तान जिलों में आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण एक सिनेरियस गिद्ध एवं एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध प्रभावित हुए, जो अस्थायी रूप से उड़ान भरने में असमर्थ होकर जमीन पर पाए गए।

स्थानीय लोगों के सूचना दिए जाने पर वन्य जीव अधिकारियों ने दोनों गिद्धों को रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद चंगा मंगा वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में स्थानांतरित किया। सिनेरियस गिद्ध को हल्की चोटें आई थीं और वह अब स्वस्थ हो रहा है। दोनों गिद्ध सामान्य रूप से भोजन कर रहे हैं। हालांकि, इस गिद्ध का ट्रैकिंग टैग प्राप्त नहीं हो सका।

2025 में भी पाकिस्तान होते हुए भारत पहुंचा था

साल 2025 में भी वन विहार ने एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की थी। एक गिद्ध को हलाली डैम से रिलीज किया गया था। टेलीमेट्री निगरानी से पता चला कि यह गिद्ध 4300 किमी से अधिक की दूरी तय कर कजाकिस्तान स्थित अपने प्रजनन क्षेत्र तक पहुंचा। इसके बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं ताजिकिस्तान होते हुए वह अक्टूबर में पुनः भारत लौट आया। इस अध्ययन से प्रवासी मार्ग, अंतरराष्ट्रीय संरक्षण चुनौतियों एवं आवास उपयोग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई, जो गिद्ध संरक्षण में एक मील का पत्थर सिद्ध हुई।

इसी क्रम में 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चार लंबी चोंच वाले गिद्ध एवं एक सिनेरियस गिद्ध सहित कुल पांच गिद्धों का सफलतापूर्वक पुनर्वास, टैगिंग एवं वन में पुनःस्थापन किया गया।

Amit Pateria