छठ महापर्व का शुभारंभ: सोमवार को दिया जाएगा पहला अर्घ्य
चार दिवसीय छठ महापर्व शनिवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने अपने घरों की सफाई कर पवित्र स्नान किया और मिट्टी के चूल्हे पर लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाकर सात्विक भोजन ग्रहण किया। यह पर्व प्रकृति और सात्विकता की उपासना का प्रतीक है।
खरना और निर्जल उपवास
रविवार को व्रतधारी खरना मनाएंगे। दिनभर निर्जल व्रत रखने के बाद, गन्ने के रस में बनी खीर, दूध-चावल का पिठ्ठा और घी लगी रोटी सूर्य भगवान को अर्पित करेंगे। इसके बाद व्रती 36 घंटे के कठिन निर्जल उपवास का संकल्प लेंगे।
महापर्व के आयोजन स्थल
शहर में करीब 200 घाटों पर छठ पूजा का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रमुख स्थान विजय नगर, तुलसी नगर, पिपलियाहना तालाब, सिरपुर तालाब और सूर्य मंदिर कैट रोड शामिल हैं। पूर्वांचल विशेषकर बिहारी समुदाय के श्रद्धालु सूर्य देव से खुशहाली की कामना करेंगे।
महिला व्रतधारियों की तैयारी
खरना के अगले दिन सुबह से महिलाएं ठेकुआ, गुजिया, पूड़ी, पुआ जैसे पारंपरिक पकवान मिट्टी के चूल्हे पर बनाती हैं। ये पकवान सूप और टोकरी में फल, नारियल और दीपक के साथ सजाकर घाट ले जाए जाते हैं। शाम को व्रती कमर-भर पानी में खड़े होकर सूर्यास्त के समय संध्या अर्घ्य देती हैं।
महापर्व का समापन
सोमवार, 27 अक्टूबर को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। छठ महापर्व का समापन मंगलवार, 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने और परिवार की मंगलकामना के साथ होगा।
Sharad Shrivastava