CJI पर जूता फेंकने के समर्थन पर विवाद, भूपेश बघेल ने भाजपा को घेरा

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CJI पर जूता फेंकने के समर्थन पर विवाद, भूपेश बघेल ने भाजपा को घेरा

CJI पर जूता फेंकने के समर्थन में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सरकारी वकील की टिप्पणी

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई पर जूता फेंकने की घटना के समर्थन में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक सरकारी वकील सतीश गुप्ता की व्हाट्सऐप टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

सरकारी वकील ने की विवादित टिप्पणी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सरकारी वकील सतीश गुप्ता ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर की प्रशंसा की। उन्होंने इसे "ऐतिहासिक पल" बताया और मुख्य न्यायाधीश की शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाए। यह पोस्ट वायरल हो गया और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुंचा, जिन्होंने इसे सोशल मीडिया पर साझा कर सरकार को निशाने पर लिया।

भूपेश बघेल का भाजपा पर हमला

कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना को दलित सम्मान पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी वकील का इस तरह न्यायाधीश पर हमले का समर्थन करना न केवल कानून का मजाक है, बल्कि यह अनुसूचित जाति समाज का भी अपमान है। बघेल ने भाजपा से तत्काल कार्रवाई की मांग की और इसे गंभीरता से न लेने पर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए।

भाजपा का पलटवार

भाजपा प्रवक्ता उज्जवल दीपक ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि भूपेश बघेल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा भारत की न्याय व्यवस्था और दलितों का पूरा सम्मान करती है।

जूता फेंकने की घटना का विवरण

6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के अंदर वकील राकेश किशोर ने CJI बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। जूता CJI तक नहीं पहुंच सका, लेकिन इस घटना ने अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाई। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आरोपी वकील को तुरंत निलंबित कर दिया।

कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस की राष्ट्रीय नेता सुप्रिया श्रीनेत और रागिनी नायक ने भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए। सुप्रिया ने इसे केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि दलितों को न्याय दिलाने की व्यवस्था पर हमला बताया।

निष्कर्ष

यह मामला केवल एक विवादित टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और दलित सम्मान के मुद्दे को भी उजागर करता है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप से यह मामला और भी जटिल हो गया है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।