चुनाव आयोग करेगा देशभर में वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण
चुनाव आयोग (EC) ने बिहार में सफलतापूर्वक विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा करने के बाद अब इसे देशभर में लागू करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अवैध मतदाताओं, जैसे विदेशी नागरिकों, मृत व्यक्तियों या स्थानांतरित लोगों को हटाना है। न्यूज एजेंसी PTI को चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी।
आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में पहले चरण की शुरुआत
PTI के अनुसार, SIR की शुरुआत उन राज्यों से होगी, जहां अगले साल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इस पहल से चुनाव आयोग मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रहा है।
बिहार में हुआ सफल SIR
बिहार में एक महीने के भीतर करीब 3 करोड़ वोटर्स का वेरिफिकेशन किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने 6 अक्टूबर को कहा था कि सभी राज्यों में SIR शुरू करने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि तीनों आयुक्त राज्यों के लिए SIR शुरू करने की तारीखों पर फैसला करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा करते हुए CEC कुमार ने अखिल भारतीय SIR योजना की जानकारी दी थी।
SIR प्रक्रिया के दो तरीके
चुनाव आयोग ने SIR के लिए दो तरीके बताए हैं:
बिहार में SIR पर विपक्ष का विरोध
बिहार में इस प्रक्रिया का विपक्ष ने जमकर विरोध किया। 9 जुलाई को महागठबंधन ने बंद का आह्वान किया, जिसके दौरान सात शहरों में ट्रेनें रोकी गईं और 12 नेशनल हाईवे जाम किए गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया गरीबों के वोट छीनने का तरीका है। राहुल गांधी ने पटना में कहा था कि महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया था, और अब बिहार में ऐसा करने की कोशिश हो रही है।
संसद में भी विरोध
संसद के मानसून सत्र में भी विपक्ष ने SIR का विरोध जारी रखा। 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चले सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने SIR पर चर्चा कराने की मांग की। उनके विरोध और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
चुनाव आयोग का विशेषाधिकार
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि पूरे देश में समय-समय पर SIR कराना उसका विशेषाधिकार है। आयोग ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का इस पर कोई निर्देश देना उसके काम में दखल होगा।
चुनाव आयोग की इस पहल से देशभर में मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की उम्मीद है। यह प्रक्रिया भविष्य के चुनावों को अधिक विश्वसनीय बनाने में सहायक होगी।