डॉक्टरों के लिए यूनिक आईडी और नेशनल मेडिकल रजिस्टर का प्रस्ताव
नेशनल मेडिकल कमीशन ने हर रजिस्टर्ड डॉक्टर को केंद्रीय स्तर पर एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देने का प्रस्ताव रखा है। एक बार राज्य मेडिकल रजिस्टर में रजिस्ट्रेशन होने पर डॉक्टर को देश के किसी दूसरे राज्य में प्रैक्टिस करने के लिए अलग से नया रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस नहीं लेना होगा।
UID जारी करने की प्रक्रिया
यह प्रस्ताव 2026 के ड्राफ्ट नियमों में शामिल है। राज्य मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद नेशनल मेडिकल कमीशन का एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड डॉक्टर को UID जारी करेगा। UID मिलने के बाद डॉक्टर का नाम नेशनल मेडिकल रजिस्टर में दर्ज होगा। यही UID देशभर में डॉक्टर की पहचान के तौर पर काम करेगा।
लाइसेंस की वैधता और रिन्यूअल
प्रस्ताव के मुताबिक, डॉक्टर का प्रैक्टिस लाइसेंस पांच साल तक वैध रहेगा। अवधि खत्म होने के तीन महीने के अंदर रिन्यू नहीं कराने पर डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन इनएक्टिव हो जाएगा। इसके बाद वह प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा और यह जानकारी नेशनल मेडिकल रजिस्टर में भी अपडेट हो जाएगी।
नेशनल डिजिटल रिकॉर्ड
नेशनल मेडिकल रजिस्टर में डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस की स्थिति और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी दर्ज रहेगी। यह रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा, जिसे मरीज और अस्पताल भी देख सकेंगे। अगर किसी डॉक्टर पर मेडिकल लापरवाही, गलत आचरण या पेशेवर कदाचार का मामला सामने आता है तो संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल जांच करेगी। अगर किसी दूसरे राज्य की काउंसिल कार्रवाई करती है, तो यह जानकारी नेशनल मेडिकल रजिस्टर और डॉक्टर के मूल राज्य के मेडिकल रजिस्टर में दर्ज होगी।
यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल
नए सिस्टम के तहत यूनिफाइड पैन इंडिया रजिस्ट्रेशन पोर्टल तैयार किया जाएगा। जिन राज्यों में पहले से डिजिटल रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है, उन्हें राष्ट्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा।
पुराने डॉक्टरों के लिए अपडेट अभियान
जो डॉक्टर पहले से इंडियन मेडिकल रजिस्टर या राज्य मेडिकल रजिस्टर में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन उनके पास UID नहीं है, उनके लिए एक बार का अपडेट अभियान चलाया जाएगा। वे एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट कर UID ले सकेंगे। इस प्रक्रिया के लिए बोर्ड की ओर से कोई फीस नहीं ली जाएगी।
Satyam Tripathi