धीरेंद्र शास्त्री बनाम भूपेश बघेल पर नया सियासी संग्राम

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धीरेंद्र शास्त्री बनाम भूपेश बघेल पर नया सियासी संग्राम

धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर राजनीति गरम, भूपेश बघेल का पलटवार

छत्तीसगढ़ के भिलाई में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कई बयान सुर्खियों में हैं। आस्था, सरकारी विमान के उपयोग और धर्मांतरण को लेकर दिए गए उनके वक्तव्यों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखा हमला बोला, जिसके बाद मामला राजनीतिक रंग ले चुका है।

दरबार, आस्था और विमान यात्रा पर धीरेंद्र शास्त्री की सफाई

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने दरबार को अंधविश्वास बताने वालों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब दरबार लगाना कुछ लोगों को अंधविश्वास लगता है तो चादर चढ़ाना और कैंडल जलाना कैसे विश्वास माना जा सकता है। उनके अनुसार आस्था के दोहरे पैमाने नहीं होने चाहिए।

सरकारी विमान से भिलाई पहुंचने पर उठे सवालों पर शास्त्री ने व्यंग्य करते हुए कहा कि क्या सनातन धर्म जागृत करने वाला व्यक्ति हवाई जहाज पर नहीं बैठ सकता। उन्होंने कहा कि देश को लूटने वाले लोग आराम से घूम सकते हैं, लेकिन कैंसर अस्पताल बनाने, बेटियों की शादी कराने और नशा छुड़वाने वाला व्यक्ति यदि विमान से यात्रा करे तो उसे निशाना बनाया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भिलाई लाने में मंत्री की भूमिका रही, इसलिए असली जिम्मेदारी लाने वालों की है, वे तो केवल आमंत्रण पर आए हैं।

भक्तों की हरकतों पर चिंता और भावुक प्रतिक्रिया

कथा के दौरान शास्त्री ने दो घटनाओं का जिक्र किया। पहली घटना में एक युवक उनकी गाड़ी के सामने आ गया, जो विवाह न होने से परेशान था और आशीर्वाद लेने पहुंचा। शास्त्री ने कहा कि गाड़ी का केवल शीशा टूटा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने कहा कि यदि उसकी शादी नहीं हुई तो उसका दिल टूट जाएगा।

दूसरी घटना में एक युवती द्वारा उनसे मिलने के लिए नस काटने की सूचना पर उन्होंने भावुक होते हुए अपील की कि ऐसा कदम न उठाया जाए, अन्यथा उन्हें भी कानूनी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

धर्मांतरण और पुलिसकर्मी की आस्था पर टिप्पणी

धर्मांतरण के मुद्दे पर धीरेंद्र शास्त्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भोले-भाले हिंदुओं को लालच और धोखे से धर्म बदलने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन्हें दूसरे धर्म के लोग ज्यादा अच्छे लगते हैं, वे वहीं जाकर बसें, देश में रहकर हिंदुओं को परेशान न करें।

कांकेर में कथित तौर पर हिंदुओं पर हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समझ नहीं आता कुछ लोग हिंदुओं से क्यों जलते हैं।

भिलाई कथा के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा टोपी उतारकर उन्हें प्रणाम करने पर उठी आपत्तियों पर भी शास्त्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वर्दी के अंदर भी इंसान होता है और उसकी भी आस्था होती है। यदि कोई अपने माता-पिता या गुरु को प्रणाम करे तो इसमें गलत क्या है। आलोचकों पर तंज करते हुए उन्होंने कहा कि यदि यह गलत मानते हो तो सबको प्रणाम करने से रोक दो।

भूपेश बघेल का हमला: चंदा और सरकारी संसाधनों पर सवाल

भिलाई की कथा के दौरान उठे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर में मीडिया से बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री और कथावाचक प्रदीप मिश्रा पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों कथावाचक यदि चंदा लेना बंद कर दें और उसके बाद भी प्रवचन करते रहें, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।

बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार धीरेंद्र शास्त्री को विशेष संरक्षण दे रही है और सरकारी संसाधनों, खासकर सरकारी विमान, का दुरुपयोग हो रहा है। उनके मुताबिक सरकार जनता के पैसे से ऐसे प्रबंध नहीं कर सकती।

विवादित बयानों और पुराने आरोपों की याद

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को न पत्रकारों की गरिमा का ज्ञान है और न ही सार्वजनिक संवाद की मर्यादा का। उन्होंने याद दिलाया कि शास्त्री पहले भी पत्रकारों को खुजली वाला कह चुके हैं और भगवान राम पर कथित विवादित टिप्पणी के कारण विवादों में रहे हैं।

बघेल ने चुनौती दी कि छत्तीसगढ़ में ही कई साधु-संत हैं जो शास्त्रों में गहरी जानकारी रखते हैं, शास्त्री चाहे तो उनसे शास्त्रार्थ कर लें। उन्होंने दोहराया कि कथावाचक धर्म और अध्यात्म की बात करें, लेकिन चंदा लेने की परंपरा खत्म करनी चाहिए, खासकर जब वे बार-बार आकर आर्थिक सहयोग जुटाते हैं।

निष्कर्ष: आस्था बनाम राजनीति की जंग

धीरेंद्र शास्त्री की कथा से जुड़े इन बयानों ने एक बार फिर आस्था और राजनीति के टकराव को सामने ला दिया है। एक तरफ शास्त्री खुद को सनातन और सेवा कार्यों का प्रतिनिधि बताते हुए सरकारी विमान यात्रा और दरबार पर उठे सवालों का बचाव कर रहे हैं, तो दूसरी ओर भूपेश बघेल इसे भाजपा से करीबी, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और चंदा संस्कृति का मुद्दा बना रहे हैं।

मामला केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का कारण बन गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद प्रदेश की सियासत और धर्म-संबंधी सार्वजनिक बहस को कितना प्रभावित करेगा, यह देखना बाकी है।

Lokendra Mishra