धीरेंद्र शास्त्री ने शिवपुरी कथा में राम-कृष्ण तुलना पर विवादित टिप्पणी की
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 29 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान भगवान राम और कृष्ण को लेकर तुलनात्मक टिप्पणी की। कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े। तुम्हारे ठाकुर जी की खोपड़िया भी टेढ़ी, नाम भी टेढ़ा, चलते और खड़े भी टेढ़े होते हैं।"
राम और कृष्ण के स्वरूप तथा कार्यों की तुलना
शास्त्री ने भगवान कृष्ण की मुद्रा का वर्णन करते हुए कहा कि उनके ठाकुर जी खड़े होने पर तीन जगह से टेढ़े होते हैं—पांव के ऊपर पांव, कमर लचकाना, खोपड़ी टेढ़ी करके बंसी बजाना। इसके विपरीत उन्होंने भगवान राम को एकदम सीधा खड़ा, सीधा नाम, सीधी चाल और सीधा दिखने वाला बताया। उन्होंने बंसी बजाने और धनुष चलाने की तुलना में कहा, "बंसी का बजाना तो खेल भी है, धनुष चलाना खेल नहीं।" गाय चराने को खेल बताते हुए कहा, "गायों को चराना तो खेल भी है, बंदरों को नचाना खेल नहीं।" गोवर्धन पर्वत उठाने के प्रसंग पर उन्होंने कहा, "तुम्हारे वाले भगवान पर्वत उठा लेते हैं तो इसमें क्या बड़ी बात है, हमारे भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया," जिसका इशारा हनुमान की ओर था।
पूर्व विवाद और शास्त्री की सफाई
इससे पहले जून 2024 में सीहोर के कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने राधारानी को लेकर टिप्पणी की थी कि उनका विवाह भगवान कृष्ण से नहीं, बल्कि मथुरा के छाता निवासी अनय घोष से हुआ था। विवाद बढ़ने पर प्रदीप मिश्रा ने बरसाना के राधारानी मंदिर में नाक रगड़कर माफी मांगी थी।
अपने बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण का विरोधी होने से इनकार किया और कहा, "इसका मतलब ये नहीं है कि हम ठाकुर जी के विरोधी हैं।" बाद में उन्होंने स्पष्टीकरण दिया: "कृष्ण जी तो टेढ़े हैं, हमारे रामजी सीधे हैं, कह दिया तो क्या गलत कह दिया? ठाकुर जी तो टेढ़े हैं न। हमने भाव में कहा है। मेरे नाम पर भी कृष्ण है। जिससे ज्यादा प्रेम होता है, न उससे ऐसी बातें की जाती हैं। मैंने प्रेम भाव में कहा है।" इसी कथा के दौरान शास्त्री ने करवा चौथ को 'खसम पूजन दिवस' कहने की बात भी कही थी।
Ravi Yadav