मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी तेज
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद गृह विभाग इस संबंध में तैयारियों में जुट गया है। मंगलवार को मंत्रियों की बैठक में मुख्यमंत्री ने इसके संकेत दिए, जिसके बाद राज्य में यूसीसी लागू होने की संभावनाओं को बल मिला है।
गोवा और उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन
समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए, मध्य प्रदेश के अधिकारी गोवा सिविल कोड और उत्तराखंड में हाल ही में लागू किए गए यूसीसी मॉडल का गहन अध्ययन कर रहे हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य प्रदेश के लिए एक व्यावहारिक और संतुलित मॉडल तैयार करना है। मसौदा तैयार होते ही इसे कैबिनेट के समक्ष पेश किया जाएगा। केंद्र सरकार ने भी राज्य सरकार को यूसीसी लागू करने के लिए सहमति दे दी है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे एक प्रमुख एजेंडा बताया था।
सामाजिक संतुलन और संभावित बदलाव
यूसीसी को लागू करने में मध्य प्रदेश की विशेष सामाजिक व्यवस्था, खासकर आदिवासी समुदायों की परंपराएं, एक चुनौती प्रस्तुत करती हैं। राज्य में 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। सरकार हर वर्ग की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, तो सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक के समान नियम लागू हो सकते हैं, बहुविवाह पर रोक लग सकती है, और महिलाओं को संपत्ति व उत्तराधिकार में समान अधिकार मिल सकते हैं।
अन्य राज्यों में यूसीसी की स्थिति
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां फरवरी 2024 में यूसीसी बिल पास हुआ और 27 जनवरी 2025 से लागू हुआ। यहां शादी और तलाक का पंजीयन अनिवार्य है, साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप का 30 दिन में पंजीयन कराना आवश्यक है। गुजरात में संपत्ति में बेटा-बेटी को बराबरी का हक है, और एसटी समुदाय को इस कानून से बाहर रखा गया है। असम में बहुविवाह को अपराध माना गया है, हालांकि वहां छठी अनुसूची क्षेत्र और एसटी कानून से बाहर रखे गए हैं, और यूसीसी अभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।
Ravi Yadav