गुड़ी पड़वा पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में ब्रह्मध्वज स्थापना की भव्य परंपरा

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गुड़ी पड़वा पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में ब्रह्मध्वज स्थापना की भव्य परंपरा

गुड़ी पड़वा पर उज्जैन में महाकाल मंदिर पर फहराएगा ब्रह्मध्वज

गुड़ी पड़वा के अवसर पर उज्जैन में धार्मिक आस्था और परंपरा का विशेष उत्साह देखने को मिलेगा। शहर के प्रमुख मंदिरों में, जिसमें महाकालेश्वर मंदिर भी शामिल है, ब्रह्मध्वज स्थापित किया जाएगा। महाकाल मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से यह ध्वजारोहण किया जाएगा।

हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत की शुरुआत

गुड़ी पड़वा से ही हिन्दू नववर्ष और विक्रम संवत के नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस पर्व को सृजन, नव ऊर्जा और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में महाकाल की प्रेरणा से ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था, इसी कारण ब्रह्मध्वज को विशेष महत्व दिया जाता है।

सदियों पुरानी परंपरा और उज्जैन का महत्व

धार्मिक नगरी उज्जैन में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। महाकालेश्वर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में भी परंपरागत रूप से ब्रह्मध्वज स्थापित किए जाएंगे, जिससे पूरे शहर में आध्यात्मिक वातावरण बनेगा। उज्जैन को काल गणना का केंद्र और सम्राट विक्रमादित्य की नगरी के रूप में जाना जाता है, जहां आज भी प्राचीन परंपराओं को जीवंत रखा गया है।

सांस्कृतिक वैभव को पुनर्जीवित करने के प्रयास

सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि उज्जैन की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शहर के सांस्कृतिक वैभव को पुनः स्थापित करने की दिशा में कार्य जारी है। गुड़ी पड़वा के अवसर पर उज्जैन एक बार फिर अपनी समृद्ध धार्मिक विरासत और परंपराओं का भव्य प्रदर्शन करेगा।

Navjeet Kaur