हरियाली तीज: सोने-चांदी के झूले पर विराजे बांके बिहारी, 50 हजार भक्तों ने किए दर्शन

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हरियाली तीज: सोने-चांदी के झूले पर विराजे बांके बिहारी, 50 हजार भक्तों ने किए दर्शन

हरियाली तीज पर बांके बिहारी के दर्शन को उमड़ी भीड़

मथुरा में शनिवार को हरियाली तीज मनाई गई। वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में सुबह से भक्तों की भीड़ रही। मंदिर की गलियां भक्तों से खचाखच भरी रहीं।

दर्शन और श्रृंगार

सुबह करीब 8 बजे मंदिर का पट खुला। भक्तों ने 10 किलो सोने और 1000 किलो चांदी से बने झूले में हरे रंग की बेशकीमती जड़ाऊ पोशाक में विराजमान बांके बिहारी के दर्शन किए। भगवान को घेवर और फैनी का भोग लगाया जाना है। अभी तक 50 हजार से अधिक भक्त दर्शन कर चुके हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था

प्रशासन का अनुमान है कि दिनभर 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु मथुरा आ सकते हैं। भीड़ को देखते हुए बांके बिहारी मंदिर से 3 किलोमीटर पहले वाहनों को रोका जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए ई-रिक्शा और ई-कार्ट की व्यवस्था की गई है।

वाहनों की एंट्री के रास्ते बदले गए हैं और 21 से ज्यादा पार्किंग बनाई गई हैं। ई-रिक्शा या ई-कार्ट का किराया 20 रुपए प्रति यात्री तय है। वाहन न मिलने पर श्रद्धालुओं को तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।

वृंदावन को 4 जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है। एक हजार से ज्यादा पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है और 69 बैरियर लगाए गए हैं।

विशेष व्यवस्था और इतिहास

बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज पर साल में एक बार झूला डाला जाता है। भगवान गर्भगृह से निकलकर आंगन में लगे झूले में विराजते हैं। बांके बिहारी पहली बार इस झूले में 19 अगस्त 1947 को विराजे थे। इस झूले को 15 अगस्त 1947 को भगवान को अर्पित किया गया था।

इस दिन बांके बिहारी को हरे रंग की बेशकीमती जड़ाऊ पोशाक और रत्न जड़ित सोने के आभूषण धारण कराए गए हैं। ठाकुरजी के विश्राम के लिए सोने-चांदी से बनी शयन शैया सजाई गई है, जिसे सुख सेज कहा जाता है। शाम को दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में भगवान गोदा रंगमन्नार चांदी के झूले में विराजमान होकर दर्शन देंगे।

Pushpendra Chaubey