इंदौर-बुधनी रेल प्रोजेक्ट में एमपी की सबसे लंबी टनल, 2 महीने में 100 मीटर खुदाई

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इंदौर-बुधनी रेल प्रोजेक्ट में एमपी की सबसे लंबी टनल, 2 महीने में 100 मीटर खुदाई

इंदौर-बुधनी रेल कॉरिडोर में मध्यप्रदेश की सबसे लंबी टनल की शुरुआत

मध्यप्रदेश में इंदौर-बुधनी के बीच लगभग 198 से 205 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉड गेज रेल लाइन का निर्माण कार्य जारी है। यह नया रेल कॉरिडोर इंदौर और बुधनी के बीच सीधा, छोटा और तेज रेल लिंक प्रदान करेगा, जिससे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले भोपाल-इटारसी मार्ग से बचा जा सकेगा। परियोजना का क्रियान्वयन रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) कर रहा है।

राज्य की सबसे लंबी 8.64 किमी टनल की खुदाई शुरू

इस प्रोजेक्ट के तहत दो सुरंगों का निर्माण होना है, जिनमें से एक 8.64 किलोमीटर लंबी टनल मध्यप्रदेश की सबसे लंबी टनल होगी। दूसरी टनल की लंबाई 1.24 किलोमीटर रहेगी। आरवीएनएल के मीडिया एडवाइजर अनिल सक्सेना के अनुसार 8.64 किमी लंबी टनल की खुदाई अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अधिकांश क्षेत्र में चट्टान के बजाय मिट्टी है। मिट्टी में खुदाई के दौरान धंसने और नालों के पानी से सीपेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

लगभग दो महीने पहले टनल-2 की खुदाई शुरू की गई थी और अब तक 100 मीटर खुदाई पूरी हो चुकी है। जटिल भू-गर्भीय परिस्थितियों के कारण प्रतिदिन औसतन केवल 1.1 मीटर की खुदाई हो पा रही है। इसके बावजूद परियोजना से जुड़े अधिकारी आश्वस्त हैं कि 8.64 किमी लंबी सुरंग को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया जाएगा।

मार्ग, अलाइनमेंट और जिलों की कनेक्टिविटी

नई रेल लाइन बुदनी से शुरू होकर इंदौर के पास मंगलियागांव तक जाएगी। यह अलाइनमेंट सीहोर, देवास और इंदौर जिलों से होकर गुजरेगा और कई कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ेगा, जहां अब तक रेल नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है। इससे मध्य और पश्चिमी मध्यप्रदेश के बीच एक छोटा और अधिक कुशल रेल लिंक तैयार होगा।

इंजीनियरिंग विशेषताएं और प्रमुख संरचनाएं

इंदौर-बुधनी प्रोजेक्ट में बड़े और जटिल सिविल इंजीनियरिंग कार्य शामिल हैं। इसमें 2 सुरंगें, 80 बड़े पुल, 99 छोटे पुल, 138 आरयूबी (रेल अंडर ब्रिज), 5 आरओबी (रेल ओवर ब्रिज), 2 लंबे वायाडक्ट और 18 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। परियोजना के तहत 15 क्रॉसिंग स्टेशन भी प्रस्तावित हैं।

टनल-2 देवास जिले के बागली और कन्नौद तहसील के अंतर्गत आने वाले कमलापुर, थालघेवारिया और हटनोरा गांवों के क्षेत्र से होकर गुजरेगी। यहां मैदानी इलाकों से लेकर ऊबड़-खाबड़ और पहाड़ी इलाकों तक विभिन्न प्रकार की स्थलीय बनावट के कारण इंजीनियरिंग चुनौतियां और बढ़ जाती हैं।

आरवीएनएल की उपलब्धि और सुरक्षा पर जोर

आरवीएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने टनल-2 में शुरुआती 100 मीटर खुदाई को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इतनी कमजोर और जटिल भू-गर्भीय परिस्थितियों में खुदाई कार्य को सुरक्षित रूप से पूरा करना आरवीएनएल टीम की सराहनीय उपलब्धि है। उनके अनुसार यह माइलस्टोन सुरक्षा, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और अनुशासित निष्पादन पर संगठन के मजबूत फोकस को दर्शाता है।

रणनीतिक कनेक्टिविटी और जंक्शन के रूप में बुधनी

नई इंदौर-बुधनी रेलवे लाइन सीधे मुंबई, दिल्ली और नागपुर की मुख्य लाइनों से जुड़ जाएगी। बुधनी को एक जंक्शन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे यह नई लाइन अत्यधिक भीड़भाड़ वाले भोपाल-इटारसी खंड और बुदनी-बरखेड़ा घाट खंड को बायपास कर देगी। इसके परिणामस्वरूप इंदौर से पूर्वी और मध्य मध्यप्रदेश, विशेष रूप से जबलपुर, नागपुर और आगे के क्षेत्रों की ओर यात्रा दूरी और समय में कमी आएगी।

अलाइनमेंट की योजना और भविष्य की क्षमता

रेल लाइन के अलाइनमेंट को इस तरह से तैयार किया गया है कि ग्रेडियंट अनुकूल रहे, वक्रता कम हो और भविष्य में यात्री एवं माल ढुलाई दोनों प्रकार के ट्रैफिक की संभावित वृद्धि को समायोजित किया जा सके। इसका उद्देश्य संचालन को अधिक सुरक्षित, तेज और ऊर्जा-कुशल बनाना है।

सामाजिक-आर्थिक और क्षेत्रीय विकास पर प्रभाव

इंदौर-बुधनी रेल कॉरिडोर से क्षेत्रीय विकास में तेजी आने की उम्मीद है। परियोजना के पूरा होने पर बाजारों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों तक बेहतर पहुंच संभव होगी। निर्माण और संचालन दोनों चरणों के दौरान बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। साथ ही, कॉरिडोर के किनारे औद्योगिक, कृषि और वाणिज्यिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

राज्य में अन्य टनल परियोजनाएं

मध्यप्रदेश में रेलवे की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में नर्मदापुरम जिले में बुधनी से बरखेड़ा के बीच 26.50 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक का काम अंतिम चरण में है, जो रातापानी अभयारण्य और विंध्याचल पर्वत श्रृंखला से होकर गुजरता है। यहां रेलवे ने पहाड़ को काटकर 6 सुरंगें बनाई हैं, जिनसे होकर ट्रेनें 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने की योजना है। यह उदाहरण भी प्रदेश में चल रही बड़े पैमाने की टनल और रेल अवसंरचना परियोजनाओं को रेखांकित करता है।

Sharad Shrivastava