इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर महाकाल लोक की तर्ज पर बनेगा रणजीत लोक
इंदौर का 150 साल पुराना रणजीत हनुमान मंदिर अब उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर भव्य रूप में विकसित किया जा रहा है। इस नए स्वरूप को रणजीत लोक नाम दिया गया है और इसे 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्माण पर खर्च और जिम्मेदारी
रणजीत लोक के विकास पर 6 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने की योजना है। मंदिर में लगने वाले पत्थरों पर भी लगभग इतनी ही राशि अलग से खर्च होगी। निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को सौंपी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और मिलने वाले दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। फिलहाल विकास कार्य की शुरुआत हो चुकी है और सबसे पहले बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया जा रहा है।
नए स्वरूप की मुख्य विशेषताएं
रणजीत लोक में छत पर कशीदाकारी की जाएगी और बाउंड्रीवॉल पर रंग-बिरंगी लाइटिंग लगाई जाएगी। परिसर में सुंदरकांड का चित्रण भी होगा। मंदिर का एरिया करीब 40 फीट आगे तक बढ़ाया जाएगा और नया मुख्य द्वार तथा शेड बनाए जाएंगे। मंदिर परिसर में पुलिस चौकी, नया जूता स्टैंड, पेयजल की व्यवस्था, बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मंदिर का इतिहास और विकास
मंदिर के पुजारी पंडित दीपेश व्यास के अनुसार, रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी अधिक पुराना है। उनके परदादा पंडित भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे और वर्तमान में उनकी पांचवीं पीढ़ी यहां पूजा-अर्चना कर रही है। शुरुआत में हनुमान जी टीन के शेड में विराजमान थे। वर्ष 1960 में मंदिर का पक्का निर्माण गर्डर-फर्शी से किया गया और 1992 में आरसीसी छत डाली गई।
पौष माह के विशेष आयोजन
हर वर्ष पौष माह में मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। इस बार भी चार दिवसीय महोत्सव 9 दिसंबर से शुरू हो चुका है। 12 दिसंबर को स्वर्ण रथ में प्रभात फेरी निकाली जाएगी और सवा लाख रक्षा सूत्र वितरित किए जाएंगे। महोत्सव के दूसरे दिन भजन संध्या आयोजित की जानी है, जिसमें कई प्रसिद्ध भजन गायक अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इससे पहले दीपोत्सव के तहत शाम 7 बजे मंदिर परिसर में 51 हजार दीये जलाकर रोशनी की जाएगी।
प्रभात फेरी की धार्मिक मान्यता
पंडित दीपेश व्यास के अनुसार, सीता हरण के बाद वानरराज सुग्रीव के आदेश पर वानर सेना उनकी तलाश में निकली थी। हनुमान जी सीता जी का पता लगाकर लौटे तो भगवान राम ने प्रसन्न होकर उन्हें रणजीत नाम दिया, क्योंकि उन्होंने रण में विजय प्राप्त कर लंका को जलाया था। इसके बाद लाखों वानरों ने हनुमान जी को कंधों पर बैठाकर पूरे जंगल में परिभ्रमण कराया। इसी घटना की प्रतीकात्मक स्मृति के रूप में पौष अष्टमी पर हर वर्ष प्रभात फेरी निकाली जाती है।
श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि रणजीत हनुमान मंदिर में इंदौर ही नहीं, आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। रणजीत लोक के रूप में विकसित होने के बाद यहां सुविधाएं बढ़ेंगी और स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बाहर से आने वाले भक्तों के लिए भी बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होगी।
Navjeet Kaur