जैसलमेर बॉर्डर पर ऑपरेशन त्रिशूल में सेना ने दिखाई ताकत

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जैसलमेर बॉर्डर पर ऑपरेशन त्रिशूल  में सेना ने दिखाई ताकत

जैसलमेर बॉर्डर पर ऑपरेशन त्रिशूल में सेना ने दिखाई ताकत

भारतीय सेना ने जैसलमेर के रेगिस्तान में दुश्मन के ठिकानों पर हमला करके अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस सैन्य अभ्यास का नाम 'ऑपरेशन त्रिशूल' था, जिसमें तीनों सेनाओं ने भाग लिया।

हेलिबोर्न ऑपरेशन का प्रदर्शन

हेलिकॉप्टरों के जरिए जवानों को दुश्मन के ठिकानों पर उतारा गया। ध्रुव, रूद्र, चेतक और चीता हेलिकॉप्टरों ने जवानों को कवर प्रदान किया। सटीक निशाने से दुश्मन को खत्म किया गया।

मल्टी-डोमेन अभ्यास

ऑपरेशन त्रिशूल में जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में तालमेल बिठाते हुए अभ्यास किया गया। सैटेलाइट और ड्रोन से रियल-टाइम तस्वीरों के आधार पर हमले किए गए।

स्वदेशी तकनीक का उपयोग

इस अभ्यास में मेड इन इंडिया टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया। स्वदेशी ड्रोन, रडार और काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसे उपकरणों का इस्तेमाल हुआ। यह तकनीक आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाती है।

भारतीय सेना की तैयारी

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने बताया कि भारतीय सेना भविष्य के लिए तैयार है। हमने एक रूद्र ब्रिगेड तैयार की है, जो इंजीनियर, साइबर और ड्रोन एक्सपर्ट्स से लैस है। यह ब्रिगेड अकेले दुश्मन से निपटने में सक्षम है।

ग्लोबल स्तर पर भारतीय सेना

'अखंड प्रहार' ने भारतीय सेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन वाली वैश्विक सेनाओं की श्रेणी में ला खड़ा किया है। यह अभ्यास भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का प्रमाण है।

Pushpendra Chaubey