कांग्रेस नेत्री पल्लवी बोलीं- दूसरी शादी कोई अपराध नहीं

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कांग्रेस नेत्री पल्लवी बोलीं- दूसरी शादी कोई अपराध नहीं

पूर्व मंत्री दीपक जोशी की तीसरी शादी पर नई कॉन्ट्रोवर्सी

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी की एक और शादी सुर्खियों में है। महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश सचिव पल्लवी राज सक्सेना ने दावा किया है कि उन्होंने दीपक जोशी से पूरी रीतियों और परिवारों की मौजूदगी में वैधानिक विवाह किया है, और यह किसी तरह का अपराध नहीं है।

आर्य समाज मंदिर में परिवारों की मौजूदगी में विवाह

पल्लवी राज सक्सेना के अनुसार उनकी और दीपक जोशी की शादी 4 दिसंबर 2025 को भोपाल के नेहरू नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में हुई। विवाह हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ। पल्लवी के माता-पिता ने कन्यादान किया, भाइयों ने पगफेरा की रस्म निभाई और भाभी ने बिछिया पहनाई। वहीं, दीपक जोशी की बहन, जीजा और भांजा-भांजी सहित उनके परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे और गठबंधन की रस्म पूरी की गई।

पहले से दो महिलाओं के दावे, पल्लवी ने दी सफाई

दीपक जोशी की इस नई शादी के बीच दो अन्य महिलाओं ने भी स्वयं को उनकी पत्नी बताकर दावे किए हैं। इनमें से एक महिला 2016 से स्वयं को पत्नी बता रही है, जबकि दूसरी का दावा है कि उसकी शादी 21 जनवरी 2025 को हुई थी।

पल्लवी का कहना है कि उन्हें इन दावों की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, दीपक जोशी की पहली पत्नी विजया का निधन 2021 में हो चुका है, और 2016 में किसी दूसरी शादी की बात उन्होंने कभी नहीं सुनी। दूसरी महिला के बारे में भी उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने उसे दीपक के साथ देखा और न ही उसका जिक्र सुना। पल्लवी का कहना है कि वे बीते लगभग 11 महीनों से लगातार दीपक के साथ रह रही हैं, यात्रा कर रही हैं और एक ही घर में रहन-सहन कर रही हैं।

रिश्ते की पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत जीवन

पल्लवी ने बताया कि यह उनकी दूसरी शादी है। वह पिछले लगभग 17 साल से तलाकशुदा हैं और उनका 18 वर्षीय बेटा वडोदरा, गुजरात में पढ़ाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी और दीपक जोशी की पहली मुलाकात एक कार्यक्रम में सामान्य रूप से हुई थी। बाद में एक परिचित के जरिए रिश्ता आया और दोनों ने बातचीत के बाद विवाह का निर्णय लिया।

पल्लवी के अनुसार, उन्होंने एक-दूसरे को इसलिए चुना क्योंकि दोनों की जिंदगी में उस समय कोई अन्य साथी नहीं था। दोनों उम्र के इस पड़ाव पर वैवाहिक जीवन में स्थिरता और साथ चाहते थे, ताकि सुख-दुख और बीमारी के समय एक-दूसरे का सहारा बन सकें।

शादी को सार्वजनिक न करने की वजह

पल्लवी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बड़े स्तर पर समारोह या रिसेप्शन नहीं किया, क्योंकि यह दोनों की दूसरी शादी है और उनकी उम्र भी काफी हो चुकी है। उन्हें आशंका थी कि लोग उनका मजाक बनाएंगे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह टिप्पणियां हुई हैं, वह उनकी आशंका को सही साबित करती हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि दूसरा विवाह करना न तो अपराध है और न ही कोई चोरी, बल्कि यह दो वयस्कों का आपसी निर्णय है, जिनके बच्चे पहले से सैटल हैं और जिन्हें जीवन के आगे के सफर के लिए एक साथी की जरूरत है।

बीमारी, बयान और बढ़ता विवाद

शादी वाले दिन ही पल्लवी के पिता को पैरालिसिस अटैक आ गया, जिसके चलते उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पल्लवी का कहना है कि इसी तनाव और पारिवारिक संकट के बीच दिए गए एक बयान को लोगों ने गलत समझ लिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह दीपक जोशी को नहीं जानतीं। उनके अनुसार, उस समय उनका पूरा ध्यान बीमार पिता और अस्थिर पारिवारिक स्थिति पर था, जिस कारण शब्दों का चयन ठीक नहीं हो पाया।

विवाह के बाद सामने आई कॉन्ट्रोवर्सी पर पल्लवी ने कहा कि कुछ महिलाएं सामने आकर अलग-अलग दावे कर रही हैं, लेकिन उनके इरादे क्या हैं, यह वही नहीं जानतीं। उन्होंने दावा किया कि एक महिला के खिलाफ पहले से कई आरोप हैं और वह काफी समय से फरार बताई जा रही है।

निष्पक्ष जांच और वैवाहिक संबंध की मान्यता की मांग

पल्लवी राज सक्सेना का कहना है कि दीपक जोशी और उस दूसरी दावा करने वाली महिला के बीच कोर्ट में मामला लंबित रहा है और दीपक ने ही उसके खिलाफ मामला दायर किया था। इस पृष्ठभूमि में उन्होंने न्यायालय और जनता से अपील की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए।

उन्होंने आग्रह किया कि अगर तथ्य सामने आएं तो उनके और दीपक जोशी के रिश्ते को कानूनी और सामाजिक रूप से स्वीकार किया जाए, क्योंकि उनके अनुसार उनका संबंध स्पष्ट, पारदर्शी और परिवारों की सहमति से स्थापित हुआ है।

निष्कर्ष

पूर्व मंत्री दीपक जोशी की नई शादी ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। एक ओर पल्लवी राज सक्सेना इसे दो परिपक्व व्यक्तियों का वैध और आवश्यक निर्णय बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर दो अन्य महिलाओं के दावे मामले को जटिल बना रहे हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि न्यायिक प्रक्रिया और आधिकारिक जांच में कौन से तथ्य सामने आते हैं और समाज तथा राजनीतिक वर्ग इस वैवाहिक विवाद को किस नजरिए से देखते हैं।

Adarsh Chaurasiya